कब तक बहायेंगे आंसू, ऐसे होती रहेगी लाशों की गिनती
मुआवजा, जांच और निलम्बन काफी नहीं, बच्चों को स्वयं ही बचाना होगा
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लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में जहां पूरी सत्ता बैठती हो वहां पर नियम-कानून लागू न होना वाकई चिंता का विषय है। कोचिंग सेंटर में सोमवार को जिन बच्चों ने जान गवाईं वह क्या हादसा था या फिर लापरवाही का वह दंश जो पूरी व्यवस्था में जड़ तक घुसा हुआ है। बहरहाल कुछ भी हो अब यह निर्धारण करना जरूरी है कि बड़े-बड़े हादसे होने के बाद भी जिम्मेदार क्यों नहीं जागते और उनको व्यवस्था दंडित क्यों नहीं करती। दंड के नाम पर मुआवजा, जांच के आदेश और निलम्बन अब सरकारी ऐक्शन का एक कहानी बनती जा रही हैं। इन पर विराम लगाना जरूरी है। अन्यथा बड़ी-बड़ी बिल्डिंगे इसी तरह लाशों की गिनती करायेंगी। कोचिंग सेँटर में आग की घटना न तो नई है न ही पहली बार हुई है। अक्सर देश और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से दर्दनाक घटनाएं पूरी व्यवस्था का तमाशा दिखाती रहती हैं। कभी किसी कोचिंग सेंटर में पानी भरने से बच्चों की मौत हो जाती है तो कभी बच्चे आग में अपनी जान गंवा देते हैं। कभी स्कूलों में आग लगती है तो वहां फायर सिस्टम ही नहीं पहुंच पाता। जो संस्थान बच्चों का भविष्य बनाने का दावा करते हैं, मोटी फीसें लेते हैं वही उनकी सुरक्षा पर जरा सा भी ध्यान नहीं देते। वह भी तब इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। हमारी व्यवस्था भी इन कोचिंग सेंटरों की ओर झांकना भी नहीं उचित समझती कि आखिर बच्चों की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।
याद करिए दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने और उनमें बच्चों की मौत के बाद को स्वत:संज्ञान लेते हुए सख्त लिहाजे में कहा था कि कोचिंग संस्थान डेथ सेंटर बन गए हैं। जहां छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। घटना पर दिल्ली और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा था हमें नहीं पता कि दिल्ली या भारत सरकार ने अब तक क्या प्रभावी उपाय किए हैं। हाल ही में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं सभी के लिए आंखें खोलने वाली हैं। सीजीआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं ताकि दिल्ली और केंद्र सरकार कारण बताएं कि अब तक क्या सुरक्षा मानदंड निर्धारित किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश-निर्देश के बाद भी सरकारें उसी ढर्रे पर हैं। यदि इस ओर तनिक भी जिम्मेदारों की आंखें खुलीं होतीं तो कम से घटनाओं पर कुछ तो विराम लगाता। बहरहाल अब व्यवस्था को दोष देना बंद कर खुद जागरुकता की ओर बढ़ें तो हमारे बच्चे सुरक्षित हो सकते हैं। हमे खुद उन कारणों को तलाशना होगा जो मौत के कारक बन जाते हैं। मसलन जिस स्कूल या कोचिंग सेंटर में बच्चों की सुरक्षा के मानक पूरे न हों वहां अपने बच्चों को भेजने से बचें। कैरियर का भविष्य इतना बड़ा नहीं कि आंखे मूद कर इन मौत के कुओं में अपने बच्चों का धकेल दें। इसलिए अभी भी समय है कि हम अपने बच्चों के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में जायें और वहां उन व्यवस्थाओं को देखें, न हो तो आपत्ति जतायें, इसके बाद भी यदि संचालक अनदेखी करें तो वहां से अपने बच्चों को निकाल लें।
ये खबर भी पढ़े : जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर के निर्देशन में बभनी चौराहे पर पुलिस बूथ निर्माण का कार्य प्रारम्भप्रेम राज सिंह ,केजीएमयू ट्रामा सेंटर प्रभारी ने बताया लखनऊ कोचिंग इंस्टीट्यूट में आग लगने की घटना । " हमारे पास करीब 22-23 लोग आए थे। जिसमें से 15 मृत पाए गए थे। 8 घायल थे। जिसमें से 6 की हालत स्थिर है दो लोगों को ज्यादा चोट आई है,15 लोगों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
पोस्टमार्टम भेजी गई डेड बॉडी की हुई पहचान
1 सागर उम्र 27 वर्ष की हुई मौत
2 नीलेश उम्र 27 वर्ष की हुई मौत
3 अनामिका उम्र 28 वर्ष की हुई मौत
4 श्याम उम्र 30 वर्ष की हुई मौत
5 अनुचा उम्र 25 वर्ष की हुई मौत
6 सोमालिया उम्र 30 वर्ष की हुई मौत
7 शाहजान उम्र 19 वर्ष की हुई मौत
8 रुक्मणि उम्र 24 वर्ष की हुई मौत
9 आदित्य श्रीवास्तव उम्र 23 वर्ष की हुई मौत
10 अब्दुल रहमान उम्र 24 वर्ष की हुई मौत
पोस्टमार्टम हाउस भेजी गई डेड बॉडी के परिजन लगातार पहुंच रहे।
कुछ बॉडी की पहचान होना अभी शेष बताया जा रहा है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
