पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज पेश नहीं होगा समान नागरिक संहिता विधेयक
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक सोमवार को पेश किए जाने की संभावना फिलहाल टल गई है। विधानसभा सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार पहले इस विषय पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। समिति की सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर बाद में विधेयक को विधानसभा में लाने पर निर्णय लिया जाएगा।
सोमवार को राज्य विधानसभा के बजट सत्र का पहला चरण समाप्त हो रहा है, जबकि दूसरा चरण 7 जुलाई से शुरू होगा। विधेयक दूसरे चरण में पेश किया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय कानून विभाग करेगा। वर्तमान में कानून विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बयान भी दे सकते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित उच्चस्तरीय समिति में किन लोगों को शामिल किया जाएगा और उसकी कार्यप्रणाली क्या होगी, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के संभावित बयान में इन पहलुओं पर भी स्पष्टता आ सकती है।
ये खबर भी पढ़े : 'वास्तविक तृणमूल' विवाद के बीच बढ़ा सियासी घमासान, पार्टी खातों पर पुलिस की कार्रवाईपिछले गुरुवार से ही इस बात की चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार सोमवार को यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में अपने भाषण के दौरान समान नागरिक संहिता के पक्ष में जोरदार पैरवी की थी। बाद में उन्होंने एक पार्टी कार्यक्रम में भी इस मुद्दे को दोहराया, जिसके बाद विधेयक पेश किए जाने की अटकलें और तेज हो गई थीं। लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि सरकार ने फिलहाल इस प्रक्रिया को टालने का फैसला किया है।
सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विधेयक को तत्काल पेश न करने का निर्णय क्यों लिया गया। हालांकि माना जा रहा है कि संवेदनशील विषय होने के कारण सरकार विधेयक के सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की गहन समीक्षा करना चाहती है, ताकि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि या कानूनी कमी न रहे।
उल्लेखनीय है कि, समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया गया था। उत्तराखंड, गुजरात और असम में यूसीसी लागू करने से पहले विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए समितियां बनाई गई थीं। उत्तराखंड में गठित समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई ने की थी। बाद में गुजरात की समिति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। असम में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी यूसीसी लागू करने की दिशा में प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और वहां भी प्रारूप तैयार करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।-
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
