वाराणसी: गंगा जलयानों की सुरक्षा और नाविक कल्याण पर मंथन, लाइसेंस व्यवस्था पर उठी मांग
सुझावों को शासन को भेजने का आश्वासन
- गंगा में जलयानों के सुरक्षित संचालन पर बैठक।
- नाविकों ने नगर निगम के पास लाइसेंस अधिकार बनाए रखने की मांग की।
- नई नावों के लिए लाइसेंस जारी करने की मांग।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में वाराणसी शहर स्थित गंगा नदी में जलयानों के सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित संचालन, नावों के नामांकन, घाट प्रबंधन, नाविक कल्याण तथा नियामक व्यवस्था को लेकर सोमवार को कचहरी स्थित कमिश्नरी सभागार में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ नाविक समाज के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव और मांगें रखीं। बैठक के दौरान नाविक समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार नाव संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार नगर निगम के पास ही बना रहना चाहिए।
ये खबर भी पढ़े : प्रेम प्रसंग में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, युवती ने पहले किया था आत्महत्या का प्रयासउन्होंने मांग की कि नगर निगम द्वारा पूर्व में जारी किए गए 1217 नावों के लाइसेंस के अतिरिक्त नई नावों के संचालन के लिए भी लाइसेंस जारी किए जाएं।
साथ ही, सामान्य नाव संचालकों को बिना अनावश्यक जटिलताओं के लाइसेंस उपलब्ध हो सके, इसके लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने का आग्रह भी किया।
बैठक में "इन-लैंड वेसल्स एक्ट" के अनुपालन में तैयार प्रारूप के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने जलयानों के संचालन, सुरक्षा मानकों, नावों के पंजीकरण, घाट प्रबंधन और नाविकों के कल्याण से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार रखे, जबकि नाविक समाज के प्रतिनिधियों ने भी विभिन्न बिंदुओं पर अपना पक्ष विस्तार से प्रस्तुत किया।
नाव संचालकों की बातें सुनने के बाद मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने आश्वासन दिया कि जलयानों के संचालन, नामांकन, सुरक्षा, घाट प्रबंधन, नाविक कल्याण और नियामक व्यवस्था से जुड़े सभी सुझावों एवं अभिमतों को संकलित कर शासन को भेजा जाएगा, ताकि अंतिम नीति निर्धारण में उनका समुचित विचार किया जा सके।
बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध प्राचीन धार्मिक नगरी है, जहां प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
ऐसे में गंगा में संचालित जलयानों की सुरक्षा और यात्रियों की संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नियामक व्यवस्था को प्रभावी और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक में अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, संयुक्त सचिव (परिवहन) राजेन्द्र कुमार मौर्य, अनुसचिव (परिवहन) अरविन्द कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) भीमसेन सिंह सहित संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
