वैज्ञानिकों में एरा के तीन डाक्टर शामिल
— इंटरनेशनल साइरैंक ग्लोबल संस्था ने जारी की सूची
— इस उपलब्धि में प्रो. फरीदी भी शामिल
लखनऊ। एरा विश्वविद्यालय के तीन वैज्ञानिकों का चयन विश्व के पांच प्रतिशत श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में किया गया है। साइरैंक ग्लोबल एक स्वतंत्र संस्था है जो विश्व भर के वैज्ञानिकों के शोध का अध्ययन कर वैश्विक स्तर पर शीर्ष वैज्ञानिकों की रैंकिंग जारी करती है। साइरैंक ग्लोबल डेटा को एकत्रित कर उसे व्यवस्थित करने और महत्वपूर्ण जानकारी निकाल उसे प्रमाणित करती है। साइरैंक ग्लोबल की ओर से हाल ही में जारी रैंकिंग में एरा विवि के डीन एमिरेट्स प्रो.एम.एम.ए. फरीदी के अलावा डॉ.शादाब रजा और डॉ. रूमाना अहमद का भी चयन साइरैंक ग्लोबल की ओर से पांच प्रतिशत श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में हुआ है। एरा विवि की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी और एक दशक के भीतर ही संस्थान के तीन वैज्ञानिकों का चयन विश्व के पांच प्रतिशत श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में हुआ है।

प्रो. एम.एम.ए. फरीदी बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो वर्ष 2017 से एरा विवि में कार्यरत हैं। प्रो. फरीदी ने अलीगढ़ मुस्लिम विवि से शिक्षा ग्रहण कर अमेरिका में प्रशिक्षण किया और दिल्ली के गुरु तेग बहादुर चिकित्सालय में निदेशक प्रो. के पद पर कार्य किया। प्रो. फरीदी एमसीआई के इंस्पेक्टर के पद भी कार्यरत रहे। प्रो. फरीदी के बच्चों के स्तनपान, खान-पान और टीकाकरण को लेकर 200 से अधिक शोधपत्र राष्टï्रीय व अंतर्राष्टï्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। प्रो. फरीदी के 4200 साइटेशन और 36 एच इंडेक्स हैं। प्रो. फरीदी के शोधपत्र अब तक 77 हजार से अधिक वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं।
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डॉ. शादाब स्टेम सेल थेरेपी के जरिए स्ट्रोक के इलाज पर काम कर रहे हैं। डॉ. शादाब रजा के अब तक 80 शोध पत्र प्रकाशित होने के साथ ही 5 पेटेण्ट हो चुके हैं और छठवें पर काम चल रहा है। डॉ. शादाब रजा अमेरिका से प्रशिक्षण प्राप्त कर बीते 11 वर्षों से एरा विवि में कार्यरत हैं। लविवि में समाज शास्त्र के प्रो. व साहित्यकार रहे स्वर्गीय डॉ. मेराज अहमद की पुत्री डॉ. रूमाना अहमद एरा विवि में ट्श्यिू कल्चर लैब इंचार्ज हैं।

डॉ. रूमाना प्राकृतिक पदार्थों के जरिए कैंसर, डायबिटीज और कोविड जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ अधेड़ उम्र की महिलाओं में होने वाले हड्डियों की कमजोरी ऑस्टियोप्रोसेस के इलाज पर भी काम कर रही हैं। डॉ. रूमाना ने बताया कि प्राकृतिक उत्पादों के प्रयोग से महिलाओं की हड्डियों में होने वाली कमजोरी को रोका जा सकता है। डॉ. रूमाना के दो प्रोजेक्ट को आईसीएमआर ने प्रायोजित किया है। इसके अलावा उनके अन्य प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी (यूपीसीएसटी) ने भी प्रायोजित किये हैं। डॉ. रूमाना के अब तक 100 से अधिक शोध पत्र राष्टï्रीय व अंतर्राष्टï्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं और उनके नाम एक पेटेण्ट भी है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
