बुद्धेश्वर के सीताकुंड में दूषित पानी से फिर हजारों मछलियां मरीं
डेढ़ महीने में तीसरी बार हुई घटना, कुंड के अंदर काई जमी
लखनऊ। गुरुवार पारा बुद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर के ऐतिहासिक सीताकुंड में एक बार फिर बड़ी संख्या में मछलियां मरी हुई मिलीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, डेढ़ महीने के अंदर तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की यह तीसरी घटना है। लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद तालाब की सफाई और पानी की जांच नहीं कराई जा रही है। सुबह तालाब की सतह पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां उतराती दिखीं। कुछ ही देर में मंदिर परिसर और आसपास के लोग वहां जमा हो गए।
आरोप है कि तालाब की साफ-सफाई को लेकर पुजारी और स्थानीय लोगों ने मंदिर के प्रशासक एसडीएम सदर अभिषेक सिंह गंभीर आरोप लगाए हैं। तालाब में भारी मात्रा में काई जमी हुई है। मंदिर के सेवादारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मरी हुई मछलियों के तालाब में पड़े रहने से बदबू फैल रही है। इससे मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। लोगों ने आशंका जताई कि अगर समय पर सफाई नहीं हुई, तो गंदगी और बदबू के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मरी हुई मछलियों को तालाब से बाहर निकलवाने के लिए सेवादार और व्यापार मंडल के पदाधिकारी आगे आए। सेवादार अंश लाला, बउवा कश्यप और बुद्धेश्वर उद्योग व्यापार मंडल के मंत्री प्रियांशु गुप्ता समेत कई लोगों ने मरी मछलियों को तालाब से बाहर निकाला। इसके बाद गड्ढा खोदकर मछलियों को जमीन में दबवा दिया गया।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तालाब के पानी की तुरंत जांच कराई जाए। साथ ही मछलियों की मौत के असली कारण का पता लगाया जाए। तालाब की नियमित सफाई और पानी की गुणवत्ता की निगरानी की व्यवस्था करने को भी कहा। लोगों का कहना है कि सीताकुंड धार्मिक आस्था से जुड़ा एक अहम स्थल है। ऐसे में बार-बार मछलियों की मौत की घटनाओं को नजरअंदाज करना चिंता की बात है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
