प्रकृति और मानवता का अटूट सम्बन्ध:डॉ. मुनीश चंद्र शर्मा
मुजाहिद खां
रामपुर:बदलते मौसम चक्र और ग्लोबल वॉर्मिंग के इस दौर में जहां पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है,वहीं डॉ. मुनीश चंद्र शर्मा का नाम एक ऐसी मशाल बनकर उभरा है जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में समाज को एक नई राह दिखाई है।
पिछले कई वर्षों से पर्यावरण और प्रकृति के सह-अस्तित्व पर काम कर रहे डॉ. शर्मा का योगदान आज के समय में न सिर्फ अनुकरणीय है,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक भी है।वह प्रतिवर्ष अपने और अपने बच्चों के जन्मदिन तथा ख़ुशी के अवसरों पर स्वयं पौधारोपण करते हैं और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करते हैं।उनकी विशेषता है कि वह हर एक पौधे का नामकरण करते हैं और उनकी संतान की तरह देखभाल करते हैं।उनके द्वारा लगाये गए ज्यादातर पौधे जीवित है।यदि किसी कारण कोई पौधा नष्ट हो जाता है तो वह उसके स्थान पर नया पौधा रोपित करते हैं।उनका कहना है कि पौधे से मित्र पुत्र या कोई अन्य आत्मीय संबंध बनाना चाहिए।ताकि आत्मीय संवेदनाओं के करण वह जीवित रह सके।
ये खबर भी पढ़े : विश्व युवा कौशल दिवस:रामपुर में रोजगार की बहार:8 कंपनियों ने 187 युवाओं को दी नौकरीडॉ. मुनीश चंद्र शर्मा का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं होना चाहिए,बल्कि इसे हर नागरिक की जीवन शैली का हिस्सा बनना होगा।उनके इस दृष्टिकोण ने जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं।
गिरते भूजल स्तर को देखते हुए उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार और वर्षा जल संचयन को लेकर जन-जागरूकता अभियानों का सफल संचालन कर किया है।अपने एक संबोधन में डॉ. मुनीश चंद्र शर्मा ने कहा कि प्रकृति और मानवता का अटूट संबंध है।"हम प्रकृति से अलग नहीं हैं,हम प्रकृति का हिस्सा हैं।यदि हम आज नदियों,जंगलों और मिट्टी को नहीं बचाएंगे,तो हम अपने भविष्य को संकट में डाल रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण कोई उपकार नहीं,बल्कि हमारा कर्तव्य है।"उनके इन्हीं निस्वार्थ प्रयासों और उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पर्यावरण मित्र पर्यावरण प्रहरी और प्रकृति दूत जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।उनका यह सफर थमा नहीं है; वे आज भी निरंतर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण चेतना की अलख जगा रहे हैं।”एक पेड़ माँ के नाम”अभियान में उन्होंने प्रशासन और अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर पौधे रोपित कर अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
