संकट में ‘राज्य आपदा मोचन बल’, कमियों की कमी से जूझ रहा!
स्वीकृत पदों की तुलना में कम अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत
सत्य प्रकाश भारती
- उत्तर प्रदेश का लगभग 30 फीसद क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा मोचन बल (यूपीएसडीआरएफ) राज्य में बाढ़, भूकंप और आग जैसी बड़ी आपदाओं से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण बल है। इसके लगातार होते आधुनिकीकरण के बावजूद, परिचालन और ढांचागत स्तर पर कुछ मुख्य चुनौतियाँ और कमियाँ देखी जाती हैं।
जानकारी के मुताबिक एसडीआरएफ में स्वीकृत पदों की तुलना में वर्तमान में स्वीकृत संख्या से कम अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वीकृत 1029 पदों के मुकाबले लगभग 838 कर्मी ही तैनात हैं। वहीं यूपी एसडीआरएफ के जवान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस की प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी से 5 वर्ष के डेपुटेशन पर आते हैं।
निरंतर ट्रांसफर और नए कर्मियों के आने से बल में विशेषज्ञता की निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। उत्तर प्रदेश का लगभग 30 फीसद क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है। लखनऊ मुख्यालय से पूरे प्रदेश (विशेषकर दूरदराज के पूर्वी या पश्चिमी जिलों) में तुरंत पहुंचना समय लेने वाला होता है, हालांकि क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र बनाए गए हैं। राज्य सरकार ने आपदाओं की सूची बढ़ाकर 11 कर दी है, जिसमें नाव दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर गैस रिसाव, और बोरवेल जैसे स्थानीय हादसे शामिल हैं। इन विविध प्रकार की स्थानीय आपातस्थितियों के लिए हर टुकड़ी को समान रूप से ढालना एक चुनौती है।
यद्यपि यूपी एसडीआरएफ के जवानों को एनडीआरएफ अकादमियों में प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन अत्याधुनिक और विशिष्ट रासायनिक, जैविक, या परमाणु जैसी आपदाओं से निपटने के लिए लगातार उच्च स्तरीय और वैश्विक स्तर के रीफ्रेसर प्रशिक्षण की गति को और तेज करने की आवश्यकता है।
वहीं राजधानी के बिजनौर स्थित मुख्यालय में बैरक और गोदाम तो तैयार हैं, लेकिन ट्रेनिंग ब्लॉक, डॉग कैनल, संचार ब्लॉक और अस्पताल जैसी कई आवश्यक बुनियादी ढांचागत सुविधाएं लंबे समय से निर्माण के विभिन्न चरणों में रही हैं। लखनऊ जैसे घने आबादी वाले शहरों में बड़े हादसों (जैसे आग या इमारत गिरने) के समय ट्रैफिक जाम और तंग गलियों के कारण भारी आपदा उपकरणों को मौके पर पहुंचाने में देरी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों के साथ रियल-टाइम डेटा और संसाधनों की मैपिंग में कभी-कभी समन्वय की कमी दिखती है।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
