प्रदेश प्रभारी एवं अध्यक्ष के बीच गुफ्तगू, चर्चा तेज
लखनऊ। अखिल भारतीय कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष व यूपी प्रभारी श्री राजेंद्र पाल गौतम एवं प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच मंगलवार को एक अहम बैठक हुई । इस दौरान दोनों नेताओं के बीच संगठन की मजबूती तथा मिशन 2027 को लेकर मंंत्रणा हुई।
इस मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बेहद गहरा और गंभीर मंथन हुआ। हर एक विधानसभा सीट, जमीनी संगठन और जन-सरोकारों को लेकर एक ठोस और अचूक रणनीति तैयार करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात सिर्फ दो नेताओं का मिलना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की तकदीर बदलने और दमनकारी ताकतों के खिलाफ जनता की आवाज को बुलंद करने पर भी आत्म मंथन किया गया। अजय राय ने कहा कि कुछ तथाकथित 'सूत्र' संगठन में गुटबाजी होने की अफवाहे फैला रहे थे। लेकिन दोनों नेताओं का संगम उनके झूठे नैरेटिव पर पूर्णविराम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की एकजुटता चट्टान की तरह मजबूत है, जिसे डिगा पाना नामुमकिन है।
लखनऊ- कानपुर मार्ग को लेकर राज्यपाल को पत्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की लगातार बिगड़ती हालत पर हस्तक्षेप करने की मांग किया है। इस पत्र में उन्होंने गोरखपुर में जनसुविधाओं और प्रशासन की खराब स्थिति पर तल्ख टिप्पड़ी किया था।
अजय राय ने अपने पत्र में कहा कि 13 जुलाई को लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का लोकार्पण किया गया। इसमें लगभग 4,200 करोड़ रुपये खर्च हुए। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के बार-बार धंसने, बड़े गड्ढे बनने, जल निकासी की खराब व्यवस्था, पुलों के हिस्सों और क्रैश बैरियर में दरार तथा मरम्मत के बाद फिर सड़क खराब होने की शिकायतें आ रही है। इसमें एक दुर्घटना में बाइक सवार की मृत्यु भी हुई। इस हाईवे की स्थिति इतनी गंभीर हुई कि एनएचएआई को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी। इसलिए अब आपका नैतिक दायित्व और भी बढ़ जाता है कि आप इस मामले को अपने प्रदेश की जनता की आवाज मानकर स्वयं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के समक्ष उठाएं।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
