सुरक्षा इंतजाम फेल; जानलेवा नहर, बरपा रहे कहर, शासन-प्रशासन बेखबर!
लखनऊ शहरी क्षेत्र में कई ऐसे नहर पूरी तरह खुले पड़े, सिंचाई विभाग व नगर निगम में इसको लेकर तालमेल नहीं
राहुल सिंह यादव/ पंकज प्रजापति
लखनऊ। राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलती एक दर्दनाक घटना सामने आई है। मानक नगर कनौसी स्थित केसरी खेड़ा क्षेत्र में डीआरएम पुलिया के पास नहर में दुर्भाग्यवश गिरने से 41 वर्षीय रवि कुशवाहा की जान चली गई। हादसे के दौरान उनकी बेटी वंशिका किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रही और उसने रोते-बिलखते पूरे घटनाक्रम की खौफनाक दास्तान बयां की। इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और जल भराव और नहर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर हर बार किसी मासूम या बेगुनाह की जान जाने के बाद ही जिम्मेदार महकमा नींद से क्यों जागता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बावजूद एसडीआरएफ टीम को मौके पर पहुंचने में लगभग ढाई घंटे का समय लग गया। तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल के पास न तो गोताखोर थे और न ही पानी में उतरने के जरूरी उपकरण, जिसके कारण हाईटेक पुलिस बेबस नजर आई। मासूम बेटी वंशिका खाकी वर्दी वालों से अपने पिता की जिंदगी की भीख मांगती रही, लेकिन संसाधनों के अभाव में स्थानीय प्रशासन केवल एसडीआरएफ का इंतजार करता रहा।
कड़ी मशक्कत के बाद घटनास्थल से कुछ दूरी पर झाड़ियों में रवि कुशवाहा का शव बरामद हुआ। वहीं जानकारों का कहना है कि सिंचाई विभाग और नगर निगम केवल हादसों के बाद ही क्यों जगाता है। नहरों की तार सुरक्षा घेरा पुलिया निर्माण सुरक्षा के तहत जाली की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग व नगर निगम की होती है लेकिन यह तब किया जाता है जब कोई घटना घटित हो जाती है और किसी की जान चली जाती है।
वहीं इस प्रकरण पर महापौर सुषमा खर्कवाल का कहना रहा कि मामला काफी संवेदनशील और गंभीर है और यदि नगर निगम की जिम्मेदारी बनती है तो उसे पूरा कराया जायेगा और साथ ही सिंचाई विभाग को भी ऐसे खुले नहरे की बैरेकेडिंग व सुरक्षा तारबंदी के लिये हमारे स्तर से लेटर लिखकर संज्ञानित कराया जायेगा।
बच्चे बिजली पोल के सहारे पार करते हैं नहर...!
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यह कोई पहला मामला नहीं है। राजधानी और उससे सटे क्षेत्रों में ऐसे कई नहर, नाले और रजबहे हैं जो सुरक्षा घेरा न होने के कारण काल बने हुए हैं। अमौसी रजबहा (सरोजनी नगर ब्लॉक के पास से गुजरने वाला अमौसी रजबहा घनी आबादी के बीचों-बीच गुजरता है ।
स्थानीय निवासी मोहम्मद सुहेल ने बताया कि छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर बिजली पोल के सहारे नहर क्रॉस करते हैं। यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यह नहर शारदा नहर से निकलकर सरोजिनी नगर और मोहनलालगंज होते हुए सांई नदी में मिलती है मोहनलालागंज बांका नाला वर्षों पुराना यह नाला दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है यहां पुलिया की ऊंचाई लगभग 2 फीट है रानीखेड़ा निवासी आरके यादव ने बताया कि रात के अंधेरे में कई बार बाइक और कारें सीधे नाले में जा गिरी हैं, जिससे लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। गोसाईंगंज क्षेत्र में न्यू जेल रोड स्थित इंदिरा नहर पुल पर 24 घंटे हादसे का खतरा मंडराता रहता है, बावजूद जिला प्रशासन की तरफ से कोई भी बैरिकेडिंग व चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
नहर में रात भर चला सर्च ऑपरेशन तब मिला था शव...!
मानक नगर का यह हादसा कोई पहला मामला नहीं है। ठीक इसी तरह बीते एक वर्ष पहले सरोजनीनगर/बंथरा थाना क्षेत्र के खुर्रमपुर गांव में भी ऐसा ही दर्दनाक हादसा हुआ था। वहां नागवा नाला पार कर रही एक युवती का पैर फिसल गया और वह नाले के तेज बहाव में बह गई।
सूचना पर पहुंची बंथरा पुलिस और ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की, लेकिन युवती का कुछ पता नहीं चला। आखिरकार एनडीआरएफ को सूचना दी गई। करीब 1 घंटे बाद पहुंची एसडीआरएफ टीम ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, तब जाकर अगली सुबह घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर युवती का शव बरामद हो सका था।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
