निघासन-खीरी,20 जुलाई(तरुणमित्र)। कहते हैं कि यदि मन में अपने गांव और समाज के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा हो तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण विकास खंड निघासन की ग्राम पंचायत बरोठा में देखने को मिला है, जहां एक साधारण परिवार से निकलकर शिक्षा को अपना मिशन बनाने वाले कृष्ण कुमार विश्वकर्मा ने गांव में शिक्षा की नई अलख जगाई है।
कृष्ण कुमार विश्वकर्मा 6 वर्ष तक गायत्री कालेज में शिक्षक रहे उसके बाद में डॉ. भीमराव आंबेडकर तराई किसान महाविद्यालय,लालपुर में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। जहां उन्होंने गांव में शिक्षा की ज्योति जलाने और गरीब परिवार के बच्चों को नवोदय विद्यालय तक भेजने का संकल्प लिया उन्होंने नौकरी और खेती से होने वाली आय के सहारे अपने गांव में अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थापना की। अपने इस विद्यालय का नाम उन्होंने अपनी स्वर्गीय माता और पिता के नाम से सरस्वती देवी कन्हैया लाल नाम रखा,ताकि उनका नाम हमेशा सम्मान से साथ जुड़ा रहे। इस कार्य से उनके पिता बहुत खुश हुए ओर ऐसे बेटे का पिता होने का गर्व महसूस किया।
गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए नवोदय विद्यालय की निःशुल्क तैयारी
कृष्ण कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर माता पिता पढ़े लिखे नहीं होते है और उनकी आर्थिक स्थिति भी सही न होने के कारण अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में नहीं पड़ा पाते हैं इसलिए हमारे मन में विचार आया कि क्यों न जैसे हमारे बच्चे नवोदय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं वैसे ही हम अपने गांव के बच्चों को निःशुल्क तैयारी करा कर नवोदय विद्यालय,सैनिक स्कूल,अटल आवासीय जैसे विद्यालयों में हमारे गांव के बच्चे पड़े और आपने गांव का नाम रोशन करे जिसके लिए हम निःशुल्क तैयारी करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस विद्यालय के खुलने से गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा अपने ही गांव में उपलब्ध होने लगी है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश इसी विद्यालय में कराया है। गांव के लोग कृष्ण कुमार विश्वकर्मा के इस प्रयास की खुलकर सराहना कर रहे हैं।
अब इंटर कॉलेज बनाने का है सपना....
कृष्ण कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल विद्यालय खोलना नहीं, बल्कि उसे भविष्य में इंटरमीडिएट तक मान्यता दिलाकर एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि उनका खेत बरोठा-महुआ संपर्क मार्ग पर ईदगाह के समीप स्थित है जहां पर वो इंटर कॉलेज खोलने और आगे उसके विस्तार की योजना पर कार्य करने के लिये आगे बढ़ रहे है।
उन्होंने कहा, "मैं न रुका हूं और न ही थका हूं। ईश्वर ने चाहा तो जल्द ही गांव में इंटर कॉलेज का सपना भी साकार होगा।"
बेटियों की शिक्षा बनेगी प्राथमिकता
कृष्ण कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि बरोठा से निघासन की दूरी लगभग छह किलोमीटर होने के कारण कई परिवार अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेज पाते। इससे अनेक बालिकाओं की शिक्षा बीच में ही रुक जाती है और उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने गांव में ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गांव के प्रत्येक घर तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाना है,क्योंकि "जब गांव शिक्षित होगा,तभी वह विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा। गांव का विकास ही मेरा संकल्प है।"
कृष्ण कुमार विश्वकर्मा की यह पहल आज ग्राम पंचायत बरोठा में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है और युवा पीढ़ी के लिए भी समाज सेवा का संदेश दे रही है।