दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने की 65 लाख लीटर डीजल बचाकर 81 करोड़ की बचत
- एचओजी प्रणाली से 16,614 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी
रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय रेल के हरित परिवहन अभियान को नई गति दी है।
अत्याधुनिक हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 65 लाख लीटर से अधिक डीजल की बचत की गई है।
ये खबर भी पढ़े : बिलासपुर: तेज रफ्तार ट्रेलर ने हाईवे पर काम कर रही महिला मजदूर को कुचला, मौके पर मौतइससे रेलवे को लगभग 81 करोड़ रुपये की राजस्व बचत हुई है, वहीं 16,614 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
रायपुर रेल मंडल अधिकारियाें के अनुसार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 25 एलएचबी आधारित ट्रेनों में एचओजी प्रणाली सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
इसके तहत अब कोचों में प्रकाश एवं वातानुकूलन के लिए आवश्यक विद्युत आपूर्ति डीजल जनरेटर के बजाय सीधे ओवरहेड विद्युत लाइन (ओएचई) के माध्यम से विद्युत इंजन से की जा रही है। इससे डीजल आधारित एंड ऑन जनरेशन (ईओजी) प्रणाली पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है।
पूर्व में एलएचबी ट्रेनों के दोनों सिरों पर लगे पावर कारों में स्थापित डीजल जनरेटर सेट से कोचों को बिजली उपलब्ध कराई जाती थी। एचओजी प्रणाली लागू होने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है।
अब विद्युत इंजन से सीधे बिजली आपूर्ति होने के कारण ईंधन की बचत के साथ रेल संचालन अधिक किफायती, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बन गया है।
एचओजी प्रणाली के प्रमुख लाभ
वर्षभर में 65 लाख लीटर से अधिक डीजल की बचत, जिससे लगभग 81 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत।
16,614 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी, जिससे हरित पर्यावरण को मजबूती।
डीजल जनरेटर समाप्त होने से ध्वनि प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी, यात्रियों को अधिक शांत एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव।
नई डिजाइन की पावर कारों में कम स्थान घेरने वाली प्रणाली के कारण सामान्य श्रेणी में अतिरिक्त बैठने की क्षमता उपलब्ध।
डीजल, लुब्रिकेंट तथा अन्य ज्वलनशील उपकरणों के कम उपयोग से अग्नि सुरक्षा में वृद्धि।
रखरखाव लागत और ईंधन पर निर्भरता घटने से रेल संचालन अधिक दक्ष, किफायती और टिकाऊ बना।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का यह नवाचार भारतीय रेल को हरित, सुरक्षित, आधुनिक और ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणाली बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
यह पहल एक ओर पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती दे रही है, वहीं दूसरी ओर यात्रियों को अधिक शांत, स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव भी प्रदान कर रही है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 25 प्रमुख एलएचबी ट्रेनों में एचओजी प्रणाली लागू की जा चुकी है, जिनमें बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, बिलासपुर-एर्नाकुलम, बिलासपुर-पटना, बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर.
छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति, दुर्ग-हजरत निजामुद्दीन हमसफर, दुर्ग-जम्मूतवी, दुर्ग-फिरोजपुर अंत्योदय, कोरबा-रायपुर हसदेव, दुर्ग-नौतनवा, दुर्ग-कानपुर बेतवा, दुर्ग-अजमेर, कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़, दुर्ग-जयपुर.
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लेखक के बारे में
माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
