लखीमपुर-खीरी,19 जुलाई(तरुणमित्र)। खरीफ सीजन के बीच किसानों की सबसे बड़ी जरूरत यूरिया खाद को लेकर नकहा ब्लॉक से बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं। क्षेत्र के एक किसान ने धोबहा स्थित एक खाद विक्रेता पर सरकारी व्यवस्था को धता बताते हुए यूरिया की कथित कालाबाजारी करने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि सरकारी मूल्य ₹270 प्रति बोरी की यूरिया किसानों को ₹500 से ₹700 तक में बेची जा रही है, जिससे किसानों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
किसान का आरोप है कि केवल महंगी यूरिया ही नहीं बेची जा रही, बल्कि यूरिया लेने वाले किसानों पर करीब ₹300 का जिंक जबरन खरीदने का भी दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कोई किसान इसका विरोध करता है तो उसके साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और धमकी दी जाती है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि प्रतिदिन शाम के समय लगभग 25 बोरी यूरिया एक प्लाईवुड फैक्ट्री को सप्लाई की जा रही है,जिससे किसानों को खाद की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि दुकानदार ने कथित रूप से कृषि विभाग के एक कर्मचारी को हर महीने पैसे देने की बात कही। हालांकि इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता की जांच प्रशासन द्वारा की जानी शेष है।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई है,जिसकी शिकायत संख्या: 40015326035138 है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कृषि विभाग इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा या किसानों की शिकायत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? खरीफ सीजन में यदि यूरिया की कथित कालाबाजारी के आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह न केवल किसानों के साथ अन्याय होगा,बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
उपरोक्त मामले जब कृषि अधिकारी से जानकारी प्राप्त करने के लिए दूरभाष के माध्यम से सम्पर्क किया गया तो कृषि अधिकारी द्वारा कॉल काट दी गयी।