आरक्षण: डिप्टी सीएम को सौंपा पत्र, शिक्षक भर्ती को लेकर उठे सवाल
लखनऊ। शनिवार आरक्षण को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करने वाला घटनाक्रम सामने आया। जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण हटाओ आंदोलन से जुड़े हर्ष दूबे और उनके साथियों ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात की। इसके बाद राजधानी के एक होटल में उपमुख्यमंत्री ने उनके साथ प्रेस वार्ता की। बताया गया कि आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक पत्र उपमुख्यमंत्री को सौंपा है। बृजेश पाठक ने कहा कि वह इस विषय में दो दिन बाद केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
इस घटनाक्रम के बाद 69,000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के बीच सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लगभग छह वर्षों से भर्ती में आरक्षण नियमों के पालन और न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जब भी वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं, उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और कई मौकों पर उनके साथ बर्बरता की घटनाएं सामने आती रही हैं।
अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल का सवाल है कि यदि किसी आंदोलनकारी समूह की मांग सुनने के लिए सरकार के जिम्मेदार पदाधिकारी प्रेस वार्ता कर सकते हैं और केंद्रीय स्तर पर बातचीत का आश्वासन दे सकते हैं, तो लंबे समय से आरक्षण नियमों के पालन की मांग कर रहे 69,000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की आवाज क्यों नहीं सुनी जा रही है? अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार अक्सर न्यायालय में मामला विचाराधीन होने का हवाला देकर आंदोलन समाप्त करने की अपील करती है।
वहीं, उनका कहना है कि जब वे न्यायालय के आदेशों और आरक्षण नियमों के अनुपालन की मांग करते हैं, तब भी उन्हें आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। अब सवाल सिर्फ 69,000 शिक्षक भर्ती का नहीं, बल्कि सरकार के कथित दोहरे रवैये का भी है। आंदोलनकारियों के साथ संवाद और बातचीत लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
