लोहिया संस्थान में पीआईसीसी लाइन पर हुई कार्यशाला
— चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने लिया भाग

लखनऊ। लोहिया संस्थान के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभाग की ओर से पीआईसीसी लाइन के उपयोग और सुरक्षित प्रक्रिया व प्रबंधन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को पीआईसीसी लाइन के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। डॉ. तुषांत और डॉ. अभिनव चौहान ने प्रतिभागियों को पीआईसीसी लाइन से संबंधित तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। सत्र के दौरान मरीज का चयन, सुरक्षित इंसर्शन तकनीक, संक्रमण की रोकथाम, कैथेटर की देखभाल तथा संभावित जटिलताओं के प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रक्रिया को समझने का अवसर भी मिला।

कार्यशाला में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन एवं इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने पीआईसीसी लाइन के सुरक्षित उपयोग और मरीज-केंद्रित देखभाल से संबंधित अपने ज्ञान एवं कौशल को और बेहतर किया। विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता अवस्थी ने कहा कि ऐसे कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य कर्मियों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या है पीआईसीसी लाइन
पीआईसीसी लाइन एक पतली, लंबी और लचीली नली (ट्यूब) होती है। इसे आमतौर पर ऊपरी बांह की एक नस में डाला जाता है, जो अंदर से होते हुए दिल के पास की एक बड़ी मुख्य नस तक पहुँचती है। इसका उपयोग लंबे समय तक दवाइयाँ, कीमोथेरेपी, तरल पोषण या एंटीबायोटिक्स देने तथा खून के नमूने लेने के लिए किया जाता है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
