राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, बड़े खुलासों के संकेत
नियुक्तियों से लेकर गिनती प्रक्रिया तक पर उठे सवाल
लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, गिनती व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही कई व्यक्तियों की भूमिका की जांच की आवश्यकता बताई गई है।
एसआईटी के सदस्य लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने मंगलवार सुबह अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को गोपनीय जांच रिपोर्ट सौंपी। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर में आने वाले दान की गणना और उसके रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच की आवश्यकता है। साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ लोगों ने व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया हो सकता है।रिपोर्ट में कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं, जबकि कुछ को निगरानी में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
एसआईटी ने चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार दान की राशि की गणना का कार्य बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से किया जाता था, लेकिन कर्मचारियों के चयन और तैनाती को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है।रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव रहा और कुछ लोगों को प्रभाव के आधार पर जिम्मेदारियां दी गईं। जांच एजेंसियों ने इससे जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी एकत्र किए हैं।
महाकुंभ और माघ मेले के दौरान बढ़ी जांच की जरूरत
जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले वर्ष महाकुंभ और इस वर्ष माघ मेले के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी। इसके चलते मंदिर में चढ़ावे की रकम भी कई गुना बढ़ गई।एसआईटी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इसी अवधि में चढ़ावे के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई। जांच टीम संबंधित रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, गणना रजिस्टर और अन्य वित्तीय विवरणों का मिलान कर रही है।
गिनती प्रक्रिया पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दानपात्रों से निकाली गई राशि को एकत्र कर सामूहिक रूप से गिना जाता था। एसआईटी यह जांच कर रही है कि क्या इस प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी और ऑडिट व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी मात्रा में नकदी के प्रबंधन के लिए बहुस्तरीय निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता होती है। जांच दल इसी पहलू की भी समीक्षा कर रहा है।
सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच
राम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच के दायरे में है। एसआईटी ने कई डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी संबंधी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि सुरक्षा और निगरानी तंत्र कितना प्रभावी था और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।सूत्रों के अनुसार सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, प्रवेश-निकास व्यवस्था और कर्मचारियों की गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है।
25 से 30 लोगों की भूमिका की पड़ताल
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े 25 से 30 लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। इनमें कर्मचारियों से लेकर अन्य जिम्मेदार व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी के खिलाफ अंतिम रूप से दोष तय नहीं किया गया है।एसआईटी का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और विस्तृत जांच अभी जारी है। अगले दो सप्ताह में अधिक व्यापक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें तथ्यों, दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होगा।
प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद अब सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या आपराधिक कृत्य के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन, श्रद्धालुओं और आम जनता की नजर बनी हुई है। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि चढ़ावे की रकम के प्रबंधन में वास्तव में क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
