राम मंदिराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 40 गणनाकर्मी हटाए गए

एसआईटी की 150 पन्नों से अधिक की रिपोर्ट सीएम को सौंपे जाने की तैयारी

Published By Shishir Patel
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच तेज हो गई है। जांच के दायरे में आए करीब 40 गणनाकर्मियों को उनके कार्य से हटा दिया गया है और उनकी जगह बैंक की ओर से नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। साथ ही चढ़ावे की गणना प्रक्रिया पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। उधर, छह दिन तक अयोध्या में जांच करने के बाद लखनऊ लौटी विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है।

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की रिपोर्ट डेढ़ सौ से अधिक पन्नों की है, जिसमें चढ़ावे की गणना व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और संबंधित लोगों की भूमिका का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

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चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

एसआईटी की जांच में सामने आया कि मंदिर में चढ़ावे की गणना के लिए करीब 40 लोगों की टीम कार्यरत थी, जिसमें ट्रस्ट और बैंक दोनों के कर्मचारी शामिल थे। जांच के दौरान कुछ गणनाकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद पूरी टीम को हटा दिया गया है। अब नए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी स्वयं अपनी मौजूदगी में दान राशि की गणना करवा रहे हैं। बैंक अधिकारियों की उपस्थिति भी अनिवार्य कर दी गई है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

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ट्रस्ट और मंदिर अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जांच पूरी होने तक मंदिर ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोगों को अयोध्या न छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव, गोपाल राव के भतीजे एवं व्हीलचेयर सेवा प्रभारी सोमेश आनंद, चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य अनिल मिश्र तथा कुछ अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

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150 लोगों की भूमिका संदिग्ध

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब 150 लोगों की भूमिका को संदिग्ध माना है। रिपोर्ट का डिजिटल डाटा सात पेन ड्राइव में सुरक्षित रखा गया है। जांच टीम ने चढ़ावा चोरी में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की भी संस्तुति की है।

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि निगरानी और नियंत्रण तंत्र में कई स्तरों पर खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। यही वजह है कि रिपोर्ट में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है।

फिर अयोध्या जा सकती है एसआईटी

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विस्तृत जांच के लिए टीम को दो से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी अभी भी अयोध्या में रहकर साक्ष्य जुटाने और तथ्यों का सत्यापन करने में लगे हैं। जरूरत पड़ने पर एसआईटी दोबारा अयोध्या जाकर जांच को आगे बढ़ा सकती है।

कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजर मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने, प्रशासनिक कार्रवाई होने और मंदिर की वित्तीय निगरानी व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। राम मंदिर जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा को जन्म दिया है।र चढ़ावा चोरी मामला: 40 गणनाकर्मी हटाए गए, एसआईटी की 150 पन्नों से अधिक की रिपोर्ट सीएम को सौंपे जाने की तैयारी

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच तेज हो गई है। जांच के दायरे में आए करीब 40 गणनाकर्मियों को उनके कार्य से हटा दिया गया है और उनकी जगह बैंक की ओर से नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। साथ ही चढ़ावे की गणना प्रक्रिया पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। उधर, छह दिन तक अयोध्या में जांच करने के बाद लखनऊ लौटी विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है।

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की रिपोर्ट डेढ़ सौ से अधिक पन्नों की है, जिसमें चढ़ावे की गणना व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और संबंधित लोगों की भूमिका का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

एसआईटी की जांच में सामने आया कि मंदिर में चढ़ावे की गणना के लिए करीब 40 लोगों की टीम कार्यरत थी, जिसमें ट्रस्ट और बैंक दोनों के कर्मचारी शामिल थे। जांच के दौरान कुछ गणनाकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद पूरी टीम को हटा दिया गया है। अब नए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी स्वयं अपनी मौजूदगी में दान राशि की गणना करवा रहे हैं। बैंक अधिकारियों की उपस्थिति भी अनिवार्य कर दी गई है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

ट्रस्ट और मंदिर अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जांच पूरी होने तक मंदिर ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोगों को अयोध्या न छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव, गोपाल राव के भतीजे एवं व्हीलचेयर सेवा प्रभारी सोमेश आनंद, चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य अनिल मिश्र तथा कुछ अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

150 लोगों की भूमिका संदिग्ध

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब 150 लोगों की भूमिका को संदिग्ध माना है। रिपोर्ट का डिजिटल डाटा सात पेन ड्राइव में सुरक्षित रखा गया है। जांच टीम ने चढ़ावा चोरी में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की भी संस्तुति की है।

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि निगरानी और नियंत्रण तंत्र में कई स्तरों पर खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। यही वजह है कि रिपोर्ट में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है।

फिर अयोध्या जा सकती है एसआईटी

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विस्तृत जांच के लिए टीम को दो से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी अभी भी अयोध्या में रहकर साक्ष्य जुटाने और तथ्यों का सत्यापन करने में लगे हैं। जरूरत पड़ने पर एसआईटी दोबारा अयोध्या जाकर जांच को आगे बढ़ा सकती है।

कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजर मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने, प्रशासनिक कार्रवाई होने और मंदिर की वित्तीय निगरानी व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। राम मंदिर जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा को जन्म दिया है।

 

लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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