राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: लखनऊ से दिल्ली तक मंथन, ट्रस्ट के कई पदाधिकारी जांच के घेरे में
जल्द दर्ज हो सकती है एफआईआर
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर और गबन के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपने वाली है। सूत्रों के अनुसार जांच की आंच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों तक पहुंच चुकी है, जबकि चढ़ावे की गणना से जुड़े करीब 30 लोगों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार मंथन चल रहा है। चूंकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था, इसलिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर कार्रवाई और संभावित पुनर्गठन जैसे मुद्दों में केंद्र सरकार की अहम भूमिका रहेगी। सूत्रों का कहना है कि अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है और उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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एसआईटी की जांच में चढ़ावे की रकम में अनियमितताओं के संबंध में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में टिन्नू यादव समेत कुछ गणनाकर्मियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक एफआईआर में टिन्नू यादव को प्रमुख आरोपी बनाया जा सकता है, जबकि अन्य गणनाकर्मी भी नामजद हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाए जाने की संभावना है, जिनके नाम विवेचना के दौरान जोड़े जाएंगे।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। जांच के दौरान ऐसे कई बयान सामने आए, जिनमें ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। टीम ने इन बयानों को गंभीरता से लिया और उनके समर्थन में कुछ साक्ष्य भी जुटाए हैं। माना जा रहा है कि विस्तृत जांच में मामले की कई और परतें खुल सकती हैं।
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मामले के सामने आने के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ के कई अधिकारियों ने स्वयं अयोध्या पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अलग से गोपनीय जांच भी की। इस जांच की रिपोर्ट पीएमओ को भेजी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में चढ़ावे की रकम में हेरफेर, प्रशासनिक लापरवाही और कुछ पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट में सुनवाई की संभावना
मामले को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने तथा मंदिर के चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है।
विहिप ने की निष्पक्ष जांच की मांग
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि जिसने भी अपराध किया है, उसे कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी की छवि खराब करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एसआईटी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उसकी जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई में देरी इसलिए की जा रही है ताकि सबूतों को ठिकाने लगाया जा सके। अखिलेश ने कहा कि लोगों का गुप्त दान गायब होना बेहद गंभीर मामला है।
आरोपों पर सोम शंकर की सफाई
मामले में गोपाल राव के रिश्तेदार बताए जा रहे सोम शंकर का नाम भी चर्चा में है। हालांकि उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सोम शंकर ने कहा कि ट्रस्ट ने उन्हें श्रद्धालुओं की सेवा और यात्री व्यवस्था का दायित्व सौंप रखा है और वह केवल वही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और किसी भी स्तर की जांच से उन्हें कोई डर नहीं है।
सोम शंकर ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से मंदिर परिसर में सेवाएं दे रहे हैं और इस दौरान बहुत कम बार अपने घर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बोरे में भरकर कोई सामान ले जाने जैसी बातें पूरी तरह झूठी और निराधार हैं।
एक-दो दिन में हो सकता है बड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार एसआईटी रिपोर्ट, पीएमओ की समीक्षा और कानूनी राय के आधार पर अगले एक-दो दिनों में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इसमें एफआईआर दर्ज होने, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू होने और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों की नजर बनी हुई है।
लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
