सरोजनी नगर तहसील: राजस्व न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल, मिल रही तारीख पर तारीख...!
लखनऊ जनपद के सबसे अहम तहसील के कार्य प्रणाली की सुस्त चाल
तहसीलदार का अब तक का कार्यकाल 382 दिन, न्यायिक कार्य महज 15 दिवस
- सीएम योगी कई बार अधिकारियों को चेता चुके कि समयबद्ध तरीके से राजस्व वादों का हो निस्तारण
लखनऊ, सरोजनी नगर। सरोजनी नगर तहसील में तैनात तहसीलदार सुखवीर सिंह का कार्यकाल 382 दिन का पूरा हो चुका है। उपलब्ध न्यायालयीय वाद पंजिका के अनुसार इस अवधि में तहसीलदार ने न्यायिक कोर्ट में केवल 15 दिन ही न्यायिक कार्य किया, जबकि शेष दिनो में अधिकांश मामलों में वादकारियों को अगली सुनवाई की तारीखें मिलती रहीं। इससे राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अधिवक्ताओं और वादकारियों का कहना है कि न्यायिक कोर्ट का नियमित संचालन न होने के कारण बड़ी संख्या में राजस्व वाद लंबित हैं। दूर-दराज से आने वाले किसान, गरीब एवं आम नागरिक बार-बार तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें केवल अगली तारीख ही मिल रही है।
तहसीलदार पर राजस्व एवं न्यायिक कार्यों के निर्वहन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में न्यायिक कोर्ट का नियमित संचालन और समयबद्ध निर्णय अपेक्षित हैं। न्यायिक कार्यों में देरी का सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो अपनी भूमि एवं राजस्व संबंधी विवादों के समाधान के लिए न्यायालय का सहारा लेते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समय-समय पर राजस्व मुकदमों के शीघ्र एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश देते रहे हैं। हाल ही में जनता दर्शन के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालय नियमित रूप से संचालित हों तथा वादकारियों को समय पर न्याय मिले। ऐसे में सरोजनी नगर तहसील की वर्तमान स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
हालांकि,तहसील के सभी न्यायालयों की स्थिति एक जैसी नहीं बताई जा रही है। अधिवक्ताओं एवं वादकारियों के अनुसार नायब तहसीलदार खुशहालगंज आस्था पांडे नियमित रूप से न्यायालय में बैठकर न्यायिक कार्यों का निर्वहन कर रही हैं। स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके न्यायालय में वादों के निस्तारण की गति बेहतर है और अन्य न्यायालयों की तुलना में अधिक सुनवाई हो रही है।
पूर्व तहसीलदार के कार्यकाल से हो रही तुलना...!
वादकारियों का कहना है कि पूर्व तहसीलदार आकृति श्रीवास्तव के कार्यकाल में राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण किया जाता था। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मामलों का निर्णय ऐतिहासिक रहा है जिससे वादकारियों को समय पर राहत मिली। इसी वजह से स्थानीय अधिवक्ता और वादकारी वर्तमान कार्यकाल की तुलना पूर्व कार्यकाल से कर रहे हैं।
वहीं सीधे जनता व फरियादियों से जुड़े इस मुद्दे पर जब तरूणमित्र टीम ने जिला प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया तो उनके निजी सहायक (पीए) ने बताया कि साहब शासन स्तर की बैठक में व्यस्त है, ऐसे में शाम को खबर लिखे जाने तक जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी से बात नहीं हो पायी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
