संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू ने तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर भेजा ज्ञापन
भाकियू नेताओं ने दिया समस्याओं का समाधान न होने पर आन्दोलन की चेतावनी
बस्ती - गुरूवार को भारतीय किसान यूूनियन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में पदाधिकारियों, किसानों, मजदूरों ने संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्र व्यापी आवाहन पर जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को 9 सूत्रीय ज्ञापन भेजा। इसी कड़ी में स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन सौंपने के बाद जिलाध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि भाकियू द्वारा प्रति वर्ष स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में टैªक्टर तिरंगा यात्रा निकाली जाती थी किन्तु भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष गौरीशंकर चौधरी के आकस्मिक निधन के कारण तिरंगा यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। बताया कि हर्रैया, भानपुर और रूधौली तहसील मुख्यालयों पर भाकियू द्वारा प्रदर्शन कर ज्ञापन भेजा गया।भाकियू के प्रदेश सचिव दिवान चन्द पटेल, मण्डल अध्यक्ष जयराम चौधरी, त्रिवेनी चौधरी, दीपनरायन आदि ने कहा कि सरकार किसान हितों के प्रति गंभीर नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। यदि शीघ्र समस्याओं का समाधान न हुआ तो भाकियू निर्णायक आन्दोलन को बाध्य होगी।
अंग्रेजों भारत छोड़ो दिवस की वर्षगांठ और अगस्त क्रांति के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन में गुरुवार को किसानों और श्रमिक संगठनों ने विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम जिलाधिकारी बस्ती के माध्यम से मांग पत्र सौंपा गया।
राष्ट्रपति को भेजे मांग पत्र में किसानों, कृषि श्रमिकों, औद्योगिक श्रमिकों, ग्रामीण मजदूरों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने 9 दिसंबर 2021 को किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा किए गए लिखित आश्वासनों को लागू नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। किसानों ने सभी फसलों के लिए सी 2़50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ही किसानों एवं दिहाड़ी मजदूरों की ऋण ग्रस्तता समाप्त करने के लिए व्यापक कर्जमाफी तथा किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी गई।
मांग पत्र में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की गई। मनरेगा को मजबूत करते हुए साल में 200 दिनों के रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी देने की मांग भी प्रमुख रही। किसानों ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की। साथ ही जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013, वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा पेसा कानून के तहत अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।मांग पत्र में कहा गया है कि ये मांगें देशभर के किसानों, श्रमिकों और आम नागरिकों की आजीविका, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से अपने संवैधानिक पद का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार को इन मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश एवं हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के राकेश, इमरान अहमद, ब्रम्हदेव चौधरी, अवनीश पटेल, तिलकराम, बंश गोपाल, दिलीप, रामकिशुन के साथ ही भाकियू के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता शामिल रहे।
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पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले सर्वेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ‘तरुणमित्र’ के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज उनके काम की पहचान है।
