नौ करोड़ खर्च, नहीं उठता अधिकारियों का फोन
लखनऊ। जिम्मेदार अधिकारियों के फोन न उठाने की बामारी आम है। हाल में एक पड़ताल में प्रदेश के 75 जिलों में से 72 जिलाधिकारियों द्वारा काल नहीं रिसीव किया। जबकि डीएम एवं एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों के फोन पर हर साल 9 करोड़ रुपये का भुगतान बीएसएनएल को किया जाता है। यह शिकायत कई बार विधायकों द्वारा सदन में की गयी जिस पर विधानसभा अध्यक्ष समीश महाना द्वारा निर्देश भी दिये गये।
जिलों में डीएम एसपी द्वारा सरकारी फोन नहीं उठाने में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। हाल में एक पड़ताल में सामने आया कि यूपी के 75 जिलों में से 72 डीएम ने सरकारी नंबर पर की गई कॉल तक रिसीव नहीं की। वहीं, किसी भी अधिकारी ने सीधे फोन पर बात नहीं की। अफसरों के सरकारी अफसर और उनके सरकारी फोन का हाल बेहाल है। मुख्यमंत्री और दर्जन भर सीनियर मंत्री जनता से संवाद करने कार्यक्रम सरकारी बैठकों में शामिल होने प्लेन, ट्रेन और कार से जिलों की ओर दौड़े रहते हैं। लेकिन आश्चर्य है सरकारी महकमों के जिलों में बड़े अफसर तहसील थाना दिवस के अलावा अन्य समय दीन दुखियारी जनता से कोई भेंट और संवाद दफ्तर आवास पर सीधे नहीं किया जा सकता है ।
इधर बीच कई सालों में सरकारी फोन नहीं उठाने में बढ़ोत्तरी हुई है। साहब बैठक में हैं एक ही उत्तर मिलता है वह भी साहब का अर्दली पीएसओ से बात होती है। जबकि पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के सरकारी फोन नंबरों के रिचार्ज पर सालाना करीब 9 करोड़ रुपए बीएसएनल को भुगतान किये जाते हैं। इस तरह आम जनता को इन सरकारी फोनों से कोई लाभ मिलता नहीं दिखता।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
