306 गांवों में तैयार होगा आपदा प्रबंधन का मास्टर प्लान
ग्राम परिचय से लेकर खतरे की पहचान,संसाधनों की मैपिंग और पुनर्वास तक बनेगी विस्तृत कार्य योजना
ललित वर्मा
लखीमपुर-खीरी,01 सितम्बर(तरुणमित्र)। बाढ़, अतिवृष्टि, वज्रपात, अग्निकांड और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर तैयारी को मजबूत किया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं राहत आयुक्त के निर्देश पर जिले की पांच प्रमुख तहसीलों के 306 गांवों में ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजना 2026-27 तैयार एवं अद्यतन की जा रही है। योजना में प्रत्येक गांव की स्थिति, संभावित खतरे, उपलब्ध संसाधनों और आपदा के बाद पुनर्वास तक का विस्तृत खाका तैयार होगा। उक्त आशय की जानकारी एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने दी।
गांव का तैयार होगा पूरा प्रोफाइल
आपदा प्रबंधन योजना में सबसे पहले ग्राम का संक्षिप्त परिचय तैयार किया जा रहा है। इसमें गांव की भौगोलिक स्थिति, आबादी और अन्य महत्वपूर्ण आधारभूत जानकारियों के साथ खतरा एवं भेद्यता प्रोफाइल तैयार होगा। पिछले 20 वर्षों में बाढ़, जलभराव, अग्निकांड, वज्रपात, सर्पदंश आदि आपदाओं से हुई जन-धन की क्षति का विवरण भी शामिल किया जाएगा।
संसाधनों की होगी सटीक मैपिंग
आपदा के समय गांव में उपलब्ध संसाधनों की पहचान कर उनका मानचित्रण किया जा रहा है। इसमें पक्के शेल्टर होम, ऊंचे सुरक्षित स्थान, पेयजल स्रोत, सरकारी व निजी नाव, ट्रैक्टर, जेसीबी, जनरेटर सहित अन्य उपलब्ध संसाधनों का विवरण दर्ज होगा। लेखपाल और ग्राम विकास अधिकारी जियो-स्टैंपिंग व फोटो के माध्यम से स्थलवार सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।
आपदा से पहले की तैयारी का भी खाका
योजना में आपदा पूर्व तैयारी के उपाय भी तय किए जाएंगे। संभावित बाढ़ एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का निर्धारण, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा संवेदनशील आबादी की सूची तैयार की जाएगी। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गंभीर रोगियों और दिव्यांगजनों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
आपदा के दौरान कौन क्या करेगा,तय होगी जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा के दौरान प्रतिक्रिया योजना तैयार की जा रही है। इसमें चेतावनी मिलने से लेकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, खोज एवं बचाव, प्राथमिक चिकित्सा, राहत सामग्री वितरण और संचार व्यवस्था तक की जिम्मेदारियां तय होंगी। ग्राम आपदा प्रबंधन समिति के माध्यम से स्थानीय स्वयंसेवकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पुनर्वास से पुनर्निर्माण तक बनेगी योजना
आपदा के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की व्यवस्था भी VDMP का हिस्सा होगी। क्षतिग्रस्त आवास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के साथ प्रभावित लोगों को राहत एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
आपदा का असर कम करने पर जोर
योजना में आपदा न्यूनीकरण/शमन योजना को भी शामिल किया गया है। बाढ़ और जलभराव वाले क्षेत्रों में जोखिम कम करने, सुरक्षित स्थानों की पहचान, आवश्यक संरचनात्मक उपायों तथा जन-जागरूकता के माध्यम से आपदा के प्रभाव को न्यूनतम करने पर जोर रहेगा।
जिला योजना से जुड़ेगा गांव का प्लान
जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के निर्देशन में संबंधित एसडीएम और तहसीलदार योजना की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। सभी 306 गांवों की योजनाएं पूर्ण होने के बाद इन्हें जिला आपदा प्रबंधन योजना से एकीकृत किया जाएगा। इससे गांव स्तर पर आपदा से पहले तैयारी, दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और बाद में राहत-पुनर्वास की व्यवस्था को एक ही प्रणाली से संचालित करने में मदद मिलेगी।
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लेखक के बारे में
पिछले एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय विजय पाल खबरों की तेज़ समझ और ज़मीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। रिपोर्टिंग और समाचार लेखन के क्षेत्र में उन्होंने निरंतर काम किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
