धौरहरा-खीरी,30 अगस्त(तरुणमित्र)। नगर पंचायत धौरहरा क्षेत्र में सरकारी धन से कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कस्बे के प्रमुख डिवाइडर रोड के चौड़ीकरण के लिए कराए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा बनाई जा रही करीब 14 इंच मोटी पक्की दीवारें रिमझिम बारिश के बीच भरभराकर ढह गईं। दीवारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
बताया जाता है कि डिवाइडर रोड के चौड़ीकरण के लिए सड़क के दोनों ओर दीवारों का निर्माण कराया जा रहा था। इसी दौरान सड़क के एक ओर करीब 25 फीट और दूसरी ओर लगभग 50 फीट लंबी दीवार ढह गई। वहीं, निर्माणाधीन अन्य हिस्सों में भी दरारें और क्षति दिखाई देने की बात सामने आई है। महज रिमझिम बारिश में निर्माणाधीन दीवारों के इस तरह धराशायी होने से लोगों ने निर्माण की मजबूती और मानकों पर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत क्षेत्र में कराए जा रहे कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से कराया जा रहा था तो सामान्य बारिश में ही नई बनी दीवारों का इस तरह ढह जाना गंभीर चिंता का विषय है।
बारिश बनी गुणवत्ता की 'अग्निपरीक्षा', निर्माण की खुली पोल
डिवाइडर रोड कस्बे की प्रमुख और खूबसूरत सड़कों में गिनी जाती है। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग के चौड़ीकरण में निर्माणाधीन दीवारों के गिरने से नगर पंचायत के विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित स्थलीय निरीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी धन से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
पहले भी सामने आ चुके हैं निर्माण कार्यों के क्षतिग्रस्त होने के मामले
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पहली घटना नहीं है। आरोप है कि करीब दो वर्ष पूर्व हाईवे किनारे नगर पंचायत क्षेत्र में बने पार्क की दीवार भी बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होकर ढह गई थी। इसके अलावा मोहल्ला अटल नगर में इज्जत घरों के निर्माण के दौरान छत पड़ते समय निर्माण ढहने की घटना का भी दावा किया जा रहा है।
इन घटनाओं को लेकर अब स्थानीय लोग निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।
ठेकेदार की भूमिका और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संबंधित ठेकेदार को नगर पंचायत में लगातार निर्माण कार्य मिलते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर सरकारी धन से होने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है और निर्माण पूरा होने से पहले मानकों की पुष्टि किस स्तर पर की जा रही है?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि डिवाइडर रोड के चौड़ीकरण कार्य की तकनीकी जांच कराकर निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सीमेंट-बालू के अनुपात, नींव और दीवार की मजबूती की जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब देखना यह है कि नगर पंचायत प्रशासन इस मामले को महज बारिश से हुआ नुकसान मानकर टालता है या फिर सरकारी धन से कराए जा रहे निर्माण की गुणवत्ता की वास्तविक जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करता है।