कई नेताओं ने बनाया 'अंडिफिटेड इलेक्टोरल रिकार्ड '
कभी नहीं हारे चुनाव, कोई 9 तो कोई 11 बार जीता इलेक्शन
लखनऊ। यूपी की सियासत में कई बड़े राजनीतिज्ञ आए और गए, कुछ नेताओं के चुनावी रिकॉर्ड चौंकाने वाले हैं। किसी ने लगातार कई बार एक ही सीट जीती, तो किसी ने अलग-अलग राज्यों और सीटों से चुनाव लड़कर हर बार जीत दर्ज की। कई नेताओं ने ' अंडिफिटेड इलेक्टोरल रिकार्ड' बनाया में है।
बेबाक बयानों के लिए चर्चित वरुण गांधी ने 2009 में पीलीभीत से लोकसभा चुनाव जीतकर सियासी सफर शुरू किया। उन्होंने 2009 में 2,81,501 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 2014 में सुल्तानपुर और 2019 में पीलीभीत से भी जीत हासिल की,लोकसभा के तीनों चुनावों में जीत दर्ज की।2024 में उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया, लेकिन चुनावी मैदान में उनका रिकॉर्ड अब तक 3-0 रहा है। उधर अनुप्रिया पटेल ने 2012 में वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से पहली चुनावी जीत दर्ज की। 2014 में उन्होंने मिजार्पुर से लोकसभा चुनाव जीता और इसके बाद 2019 और 2024 में भी मिजार्पुर से जीत दोहराई। यह रिकॉर्ड उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति के बेहद सफल युवा चेहरों में शामिल करता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी ने 1981 में अमेठी लोकसभा सीट के उपचुनाव से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया था। उन्होंने उस उपचुनाव के बाद 1984, 1989 और 1991 में भी अमेठी से जीत दर्ज की। 21 मई को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी रैली के दौरान राजीव गांधी आत्मघाती हमलावर के हमले का शिकार हो गए।
समाजवादी पार्टी के मुखिया चीफ अखिलेश यादव का चुनावी रिकॉर्ड थोड़ा अलग है, क्योंकि उन्होंने कई बार एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। 2000 में कन्नौज उपचुनाव से शुरूआत के बाद उन्होंने 2004 और 2009 में कन्नौज से जीत दर्ज की। 2009 में उन्होंने फिरोजाबाद से भी चुनाव जीता। 2019 में आजमगढ़ और 2022 में करहल से जीत हासिल की। 2024 में कन्नौज से फिर लोकसभा पहुंचे। उनके खाते में 8 चुनावी मुकाबले और 8 जीत दर्ज होती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ 26 साल की उम्र में 1998 में गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद1999 2004 ,2009 ,2014 में लगातार पांच लोकसभा चुनाव जीते। 2022 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और गोरखपुर शहरी सीट से 1.65 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर जीत दर्ज की। जिस मैदान में उतरे, वहां अब तक हारे नहीं। रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने 1993 में कुंडा विधानसभा सीट से अपना चुनावी सफर शुरू किया। इसके बाद 1996, 2002, 2007 ,2012,2017 और 2022 मे जीत दर्ज की। उन्होंने कुंडा से लगातार सातवीं जीत हासिल की। करीब तीन दशक से कुंडा की राजनीति में उनका दबदबा कायम है।
सोनिया गांधी का राजनीतिक गढ़ रायबरेली बना।2004, 2006 के उपचुनाव, 2009, 2014 और 2019 हर बार उन्होंने जीत दर्ज की। इस हिसाब से अगर अलग-अलग सीटों के कांटेस्ट को गिना जाए तो उनके खाते में 7 चुनावी मुकाबले और 7 जीत आती हैं। 2019 के बाद उन्होंने लोकसभा की जगह राज्यसभा का रुख किया। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी रिकार्ड काबिले तारीफ है। उन्होंने गुजरात से वाराणसी तक हर चुनाव में जीत दर्ज की। पीएम नरेंद्र मोदी का इलेक्टोरल रिकॉर्ड बेहद खास है। 2002 में राजकोट से पचुनाव जीतने के बाद उसी साल मणिनगर से विधानसभा चुनाव जीता। फिर 2007 मणिनगर 2012 मणिनगर 2014 वडोदरा से जीते। इसके बाद वाराणसी 2019, वाराणसी 2024 वाराणसी में जीत हासिल की।2002 से अब तक कोई चुनावी हार नहीं।
सबसे बड़ा नाम किसानों के मसीहा एवं पूर्च प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने 1937 में संयुक्त प्रांत की विधानसभा से चुनावी राजनीति शुरू की और 1937 से 1974 तक लगातार 8 बार उस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनके आधिकारिक आर्चिव में 1937, 1946, 1952, 1957, 1962, 1967, 1969 और 1974 का उल्लेख मिलता है। इसके बाद 1977, 1980 और 1984 में बागपत से लोकसभा चुनाव जीते। इस तरह 1937 से 1984 तक कुल 11 चुनावी जीत गिनने पर उनका रिकॉर्ड 11-0 बनता है।
इसी तरह कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से कई बार जीत दर्ज किया। अब उनकी बेटी आराधना मिश्रा भी दूसरी बार विधायक है। इसी तरह प्रदेश के वित्त्मंत्री सुरेश खन्ना ने भी शाहजहांपुर से कई बार जीत दर्ज किया कभी हार का मंह नहीं देखा। सभी नेताओं की कहानी एक जैसी नहीं है। किसी ने एक ही सीट को अपना गढ़ बनाया। किसी ने अलग-अलग राज्यों और सीटों से जीत दर्ज की। किसी ने पार्टी के मजबूत संगठन के सहारे जीत हासिल की। किसी ने व्यक्तिगत जनाधार के दम पर भी अपना परचम लहराया। लेकिन कॉमन एक बात 'चुनाव दर चुनाव जीतने की क्षमता' है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
