ऊर्जा निगमों से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली करे प्रबंधन: समिति
मुख्यमंत्री द्वारा अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। 02 सितम्बर को लोक भवन में प्रस्तावित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के पोर्टल एवं लोगो का शुभारम्भ किया जाना है तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के बढ़े हुए मानदेय सहित अनेक महत्वपूर्ण सुविधाओं की घोषणा की जानी है।
संघर्ष समिति ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि लगभग एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके शोषण को रोकने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग निगम के गठन की पहल की थी। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि ऊर्जा निगमों के प्रबंधन ने मुख्यमंत्री जी की इस मंशा और आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों के अनुरूप कदम उठाने के बजाय बड़े पैमाने पर अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी जारी रखी।
संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों को शोषण से बचाने, रोजगार सुरक्षा देने और उनका मानदेय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा निगमों में निजीकरण और डाउनसाइजिंग के नाम पर पिछले लगभग दो वर्षों से बड़ी संख्या में आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब 02 सितम्बर को प्रदेश के अन्य विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की जा रही है, तो क्या ऊर्जा निगमों में कार्यरत आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों को भी बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलेगा और निजीकरण के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस लिया जाएगा?
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की मांग और उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाना विद्युत व्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों के हित में नहीं है।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि ऊर्जा निगमों में हटाए गए सभी योग्य एवं अनुभवी आउटसोर्स/संविदा कर्मचारियों को पुनः सेवा में लिया जाए, कर्मचारियों की छंटनी रोकी जाए तथा वर्तमान आउटसोर्स कर्मचारियों को भी 02 सितम्बर को घोषित बढ़े हुए मानदेय का लाभ दिया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि “ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारी भी उत्तर प्रदेश के ही कर्मचारी हैं। उन्हें अन्य विभागों के कर्मचारियों से मिलने वाले संरक्षण, रोजगार सुरक्षा और सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता।” संघर्ष समिति को विश्वास है कि मुख्यमंत्री इस मामले का संज्ञान लेकर पावर कॉरपोरेशन एवं ऊर्जा निगम प्रबंधन को हटाए गए कर्मचारियों की बहाली, छंटनी पर रोक तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश देंगे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
