14 साल बाद प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में इंसाफ, सातों दोषियों को उम्रकैद
महिला आयोग सदस्य के पति विनय अग्रवाल व पुत्र अपूर्व अग्रवाल समेत सात दोषियों को आजीवन कारावास
रामनाथ सिंह
- पीड़ित परिवार को मिलेगा 90 प्रतिशत जुर्माना मुआवजा
बिजनौर। जनपद के बहुचर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में 14 वर्ष बाद आखिरकार न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सातों दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट-द्वितीय के न्यायाधीश शहजाद अली ने साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद मुख्य आरोपी संजय गुप्ता सहित सभी सात अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। फैसले के बाद सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया।

दोषियों में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन के पति विनय अग्रवाल तथा पुत्र अपूर्व अग्रवाल भी शामिल हैं। अदालत के इस निर्णय की पूरे जनपद में व्यापक चर्चा है।
14 वर्षों का संघर्ष बना न्याय की मिसाल
इस मामले का सबसे भावुक पक्ष प्रबल अग्रवाल की बहन प्राची का रहा, जिन्होंने माता-पिता के निधन के बाद अकेले अपने भाई को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखी। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया, सामाजिक दबाव और कथित धमकियों के बावजूद उन्होंने हर सुनवाई में उपस्थित रहकर मुकदमे की पैरवी की।
फैसला सुनाए जाने के बाद भावुक प्राची ने कहा, "जिस दिन मेरे भाई की हत्या हुई थी, उस दिन भी बारिश हो रही थी और आज जब इंसाफ मिला है, तब भी आसमान रो रहा है।" उनके इस बयान ने अदालत परिसर में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
2012 में हुई थी सनसनीखेज वारदात
यह घटना 19 दिसंबर 2012 की है। बिजनौर शहर के एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित अग्रसेन जयंती कार्यक्रम के दौरान जाटान मोहल्ला निवासी प्रबल अग्रवाल, पुत्र आलोक अग्रवाल, पर छेड़छाड़ का आरोप लगने के बाद कथित रूप से उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। आरोप है कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को गंगा नदी में फेंक दिया गया था।
प्रबल के लापता होने के बाद परिवार ने लगातार पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शव की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर शहर में कई प्रदर्शन हुए। बाद में पुलिस ने गंगा नदी से प्रबल का शव बरामद किया, जिससे पूरे जनपद में आक्रोश फैल गया था।
सातों दोषियों को यह सजा
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) प्रमोद कुमार शर्मा, अजीत कुमार पवार तथा विशेष लोक अभियोजक (एनडीपीएस) रितेश चौहान ने संयुक्त रूप से बताया कि न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्त को—
धारा 302 (हत्या) में आजीवन कारावास तथा ₹1,00,000 अर्थदंड।
धारा 364 में 7 वर्ष का कारावास तथा ₹10,000 अर्थदंड।
धारा 147 में 1 वर्ष का कारावास।
धारा 201 में 3 वर्ष का कारावास तथा ₹5,000 अर्थदंड।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि वसूल किए गए जुर्माने की 90 प्रतिशत राशि पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति (कम्पनसेशन) के रूप में प्रदान की जाएगी।
विवेचना पर भी अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने मामले की प्रारंभिक विवेचना पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए तत्कालीन विवेचना अधिकारी, तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी तथा तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा सही ढंग से जांच न किए जाने के संबंध में डीआईजी मुरादाबाद को पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं।
14 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मुकदमे में आया यह फैसला न केवल प्रबल अग्रवाल के परिवार के लिए न्याय की जीत माना जा रहा है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भी न्याय की उम्मीद कायम रह सकती है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
