डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ को हिन्दी साहित्य भूषण सम्मान
बस्ती - पिछले 5 दशक से साहित्य साधना में समर्पित 8 पुस्तकांे के रचयिता और दुमदार दोहों के जनक 74 वर्षीय डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ को उनके साहित्यिक योगदान के लिये साहित्य मण्डल श्रीनाथद्वारा राजस्थान में हिन्दी साहित्य भूषण से सम्मानित किया गया।
साहित्य मण्डल राजस्थान के श्रीनाथद्वारा में आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक संगोष्ठी, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और सारस्वत सम्मान समारोह में डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ को संस्था के प्रधानमंत्री श्यामदेवपुरा ने सम्मानित किया।
कवि एवं चिकित्सक डा. वी.के. वर्मा ने डॉ. जगमग को सम्मानित किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि उनकी कृति ‘चाशनी’ से लेकर ‘ किसी की दिवाली किसी का दिवाला’ विलाप खण्ड काव्य, ‘हम तो केवल आदमी है’ ‘ सच का दस्तावेज’ खुशियांे की गौरैया, ‘बाल सुमन’ बाल चेतना, नन्हें मुन्नों का संसार आदि कृतियों के रचयिता का सम्मान हम सभी साहित्यकारों के लिये गौरव का क्षण है।
डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ को हिन्दी साहित्य भूषण से सम्मानित किये जाने पर डॉ. त्रिभुवन मिश्र, विनोद उपाध्याय, श्याम प्रकाश शर्मा, बटुकनाथ शुक्ल, सलीम बस्तवी, दीपक सिंह प्रेमी, अर्चना श्रीवास्तव, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’, अफजल हुसेन अफजल, अनवार पारसा आदि ने प्रसन्नता व्यक्त किया हैै।
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पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले सर्वेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ‘तरुणमित्र’ के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज उनके काम की पहचान है।
