शिल्पकारों के जाति प्रमाणपत्र पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 26 उपजातियों के लिए खुला रास्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिकारियों को आवेदन की जांच कर कानून के मुताबिक त्वरित निर्णय लेने का दिया निर्देश
लखनऊ। वर्षों से जाति प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे शिल्पकार समुदाय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का आदेश बड़ी राहत की उम्मीद लेकर आया है। उच्च न्यायालय ने शिल्पकार जाति प्रमाणपत्र जारी करने के मामलों में अधिकारियों को आवेदन की जांच कर कानून के अनुसार त्वरित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इससे प्रमाणपत्र के अभाव में सरकारी योजनाओं और संवैधानिक अधिकारों का लाभ पाने से वंचित पात्र शिल्पकारों के लिए रास्ता आसान होने की उम्मीद है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने भारतीय शिल्पकार समिति की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की प्रविष्टि-62 का हवाला देते हुए शिल्पकार एवं मान्यता प्राप्त उपजातियों को जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करने की मांग की गई थी।
26 उपजातियों के लिए अहम आदेश
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि शिल्पकार जाति के अंतर्गत आने वाली मान्यता प्राप्त उपजातियों के कई लोग प्रमाणपत्र से वंचित हैं। समिति के अनुसार शिल्पकार के अंतर्गत आने वाली 26 उपजातियों के पात्र लोगों को इस आदेश से लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रमाणपत्र देना है या नहीं, जांच के बाद तय करें अधिकारी
हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति शिल्पकार है या नहीं, यह तथ्य का विषय है। इसलिए संबंधित अधिकारियों का दायित्व है कि आवेदन मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों की जांच करें और कानून के अनुरूप निर्णय लें। अदालत ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विलोपन के कगार पर खड़े समूहों को न्याय की उम्मीद
भारतीय शिल्पकार समिति का कहना है कि प्रमाणपत्र की प्रक्रिया स्पष्ट न होने के कारण शिल्पकार समुदाय के कई पात्र लोग लंबे समय से परेशान थे। प्रमाणपत्र नहीं होने से उन्हें सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब पात्र शिल्पकारों के मामलों की जांच कर नियमानुसार निर्णय होने की उम्मीद बढ़ी है। भारतीय शिल्पकार समिति के विधि सलाहकार एवं हाई कोर्ट लखनऊ पीठ के अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा ने आदेश को शिल्पकार समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया। समिति के जिला संयोजक शंभू कुमार ने भी इसे समुदाय के लिए राहत देने वाला कदम बताया।
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