मिट्टी से उठे सपनों की उड़ान: किसान के बेटे गंभीर सिंह ने संघर्ष को बनाया सफलता की पहचान
अभावों से प्रशासनिक सेवा तक का प्रेरक सफर, शिक्षा और जनसेवा में भी छोड़ी अमिट छाप
लायक हुसैन
गाजियाबाद। कुछ कहानियाँ केवल सफलता की नहीं होतीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सेवा की ऐसी मिसाल बन जाती हैं जो समाज की नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का साहस देती हैं। बिजनौर जनपद के नगीना क्षेत्र स्थित किरतपुर गाँव के किसान परिवार में जन्मे गंभीर सिंह की जीवन यात्रा भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है।
साधारण किसान परिवार में जन्मे गंभीर सिंह ने बचपन से ही अभावों का सामना किया। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती बन जाता था। स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। वे साथियों से किताबें लेकर रातभर पढ़ते और सुबह उन्हें वापस कर देते, लेकिन अपने सपनों को कभी लौटने नहीं दिया।
एक दिन शिक्षक ने उनसे पूछा, 'इतनी कठिनाइयों के बावजूद तुम हार क्यों नहीं मानते?'
गंभीर सिंह का उत्तर आज भी हर संघर्षरत युवा के लिए प्रेरणा है-'गरीबी मेरी मजबूरी हो सकती है, लेकिन हार मान लेना मेरी पसंद नहीं।' यही सोच उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। कठिन परिश्रम, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और वर्ष 2013 की उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (PCS-2013) परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया।
प्रशासनिक अधिकारी बनने के बाद जब वे पहली बार अपने गाँव लौटे तो सीधे उसी विद्यालय पहुँचे, जहाँ कभी साधारण छात्र के रूप में बैठकर बड़े सपने देखा करते थे। बच्चों से उन्होंने कहा-'हालात आपकी शुरुआत तय करते हैं, लेकिन आपका संघर्ष आपकी मंज़िल तय करता है।'
ये खबर भी पढ़े : नव नियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी का जनपद मुख्यालय पर प्रथम आगमन सोमवार को प्रशासनिक सेवा में आने के बाद गंभीर सिंह ने केवल सरकारी जिम्मेदारियाँ ही नहीं निभाईं, बल्कि संवेदनशील और जनहितैषी अधिकारी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। गाजियाबाद में एडीएम सिटी के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल करते हुए सैकड़ों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का कार्य किया। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों को प्रेरित करने और जरूरतमंद बच्चों तक अवसर पहुँचाने के उनके प्रयासों की व्यापक सराहना हुई।
वर्तमान में आजमगढ़ में एडीएम (एफ.आर.) के पद पर कार्यरत गंभीर सिंह अपनी कार्यशैली, सादगी और जनसरोकारों के कारण एक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक अभिभावक के रूप में भी पहचान बना चुके हैं। आमजन की समस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता और समाधान केंद्रित कार्यशैली उन्हें प्रशासनिक सेवा में विशिष्ट स्थान दिलाती है।
गंभीर सिंह की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि सपनों की ऊँचाई आर्थिक परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि व्यक्ति का साहस, मेहनत और दृढ़ संकल्प तय करते हैं। किरतपुर के किसान के बेटे से प्रशासनिक अधिकारी बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है।
जीवन का संदेश
परिस्थितियों को कभी अपनी क्षमता से बड़ा मत बनने दीजिए।
किस्मत से अधिक अपनी मेहनत और ईमानदार प्रयास पर भरोसा रखिए।
संघर्ष का रास्ता कठिन अवश्य होता है, लेकिन उसकी मंज़िल सबसे सुंदर होती है।
'जो रास्तों की कठिनाइयों से नहीं घबराते, इतिहास उन्हीं के कदमों के निशान याद रखता है।'
गंभीर सिंह की यह प्रेरणादायक यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि हर उस युवा के सपनों का प्रतीक है जो सीमित संसाधनों के बावजूद असीमित हौसलों के साथ अपने भविष्य को बदलने का साहस रखता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
