बहुचर्चित जौनपुर खाद्यान्न घोटाला: 21 साल बाद EOW के हत्थे चढ़ा कोटेदार
फर्जी मस्टर रोल बनाकर किया था सरकारी राशन का गबन
वाराणसी EOW टीम ने आरोपी को किया गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित जौनपुर खाद्यान्न घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) को बड़ी सफलता मिली है। ईओडब्ल्यू सेक्टर वाराणसी की टीम ने करीब दो दशक पुराने मामले में फरार चल रहे तत्कालीन कोटेदार वरिन्द्र बहादुर सिंह को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर फर्जी मस्टर रोल तैयार कर मजदूरों के नाम पर सरकारी खाद्यान्न और नकद राशि का गबन करने का आरोप है।
ईओडब्ल्यू द्वारा अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। आरोपी को उसके निवास स्थान के निकट से सुबह करीब 9:35 बजे गिरफ्तार किया गया। वह अनुसंधान संख्या-169/2020, मुकदमा अपराध संख्या-15/2020 में वांछित चल रहा था।
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जांच के अनुसार वर्ष 2004-05 के दौरान जौनपुर जिले के विकास खंड रामनगर में केंद्र एवं राज्य सरकार की सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित थे। इनमें नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, सड़क की पटरी की मरम्मत, संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य, सीसी रोड और पुलिया निर्माण जैसे कार्य शामिल थे।
ये खबर भी पढ़े : विद्युत विभाग में गड़बड़ी उजागर, जांच रिपोर्ट के बाद तीन इंजीनियरों पर गिरी कार्रवाई की गाजयोजना के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को मजदूरी के बदले खाद्यान्न (चावल) और नकद धनराशि दी जानी थी, लेकिन आरोप है कि संबंधित अधिकारियों एवं अन्य आरोपियों ने मिलकर फर्जी मस्टर रोल तैयार किए। इन फर्जी अभिलेखों के आधार पर काल्पनिक मजदूर दर्शाकर सरकारी खाद्यान्न और धनराशि का गबन कर लिया गया, जबकि वास्तविक मजदूरों को उनका अधिकार नहीं मिला।
सरकार को हुआ आर्थिक नुकसान
ईओडब्ल्यू की विवेचना में सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकार को लगभग 1,02,536 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। जांच के दौरान संकलित दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर तत्कालीन कोटेदार वरिन्द्र बहादुर सिंह की भूमिका प्रमाणित होने पर उसे आरोपी बनाया गया।
गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा
आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यास भंग), 467, 468, 471 (जालसाजी एवं फर्जी दस्तावेजों का उपयोग), 477ए (लेखा में हेराफेरी), 120बी (आपराधिक साजिश) और 34 के तहत मुकदमा दर्ज है। मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन, वाराणसी द्वारा की जा रही है।
भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में किया गया पेश
गिरफ्तारी के बाद ईओडब्ल्यू टीम ने आरोपी को वाराणसी स्थित विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) कोर्ट-2 के समक्ष पेश किया। न्यायालय में प्रस्तुत करने के बाद उसके खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, मामले में वांछित अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भी अभियान जारी है। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
