अवसर का लाभ उठाएं किसान, करें हरी सब्जी, प्याज की खेती - डॉ एस. के. तोमर
बस्ती - प्याज की बढ़ती कीमतों और हाल ही में जनपद में हुई बारिश का लाभ उठाते हुए किसान भाई सब्जी वाली हरी प्याज की खेती कर सकते हैं। अल-नीनो के प्रभाव के कारण आने वाले समय में बारिश की कम संभावना है, ऐसे में कम अवधि (45 दिन) वाली हरी प्याज की फसल एक बेहतरीन विकल्प है। अक्टूबर-नवंबर के दौरान बाजार में सब्जियों की कमी रहती है, जिससे हरी प्याज के 60 से ₹70 प्रति किलो तक बिकने की प्रबल संभावना है। किसान भाई समय पर इसकी बुवाई कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
उन्होंने बताया की हरी प्याज की खेती से 45 दिनों में प्रति एकड़ लगभग 125 से 150 क्विंटल हरी प्याज तैयार हो जाती है।जिसका बाजार भाव खेत से ही हरी प्याज का थोक भाव ₹25 से ₹30 प्रति किलो मिल जाता है।लागत: खेती में खाद, बीज, जुताई और दवाइयों का कुल खर्च लगभग ₹96,000 से ₹1,00,000 आता है।
भूमि चयन: अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है। भारी या जलभराव वाली भूमि में इसकी बुवाई न करें।जैविक उपचार: जुताई के समय प्रति एकड़ 4–5 ट्रॉली अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, नीम की खली और 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा (गोबर की खाद में मिलाकर) खेत में डालें।अंतिम जुताई के समय 100 किग्रा सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP), 50 किग्रा यूरिया और 25 किग्रा मैग्नीशियम सल्फेट प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं।अगेती खेती के लिए एग्रीफाउंड डार्क रेड किस्म की छोटी गांठों (Bulblets/Sets) का चयन करें। प्रति एकड़ 7 से 8 क्विंटल गांठों की आवश्यकता होती है।खेत में 1-1 फीट की दूरी पर मेड़ (Raised Bed) बनाएं और मेड़ पर गांठ से गांठ की दूरी 10 सेंटीमीटर रखते हुए बुवाई करें।प्रति एकड़ लगभग 1.5 से 2 लाख पौध होने पर 45 दिन में प्रति पौधे का वजन 75 से 100 ग्राम हो जाता है, जिससे आसानी से 150 क्विंटल तक की पैदावार मिल जाती है।
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पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले सर्वेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ‘तरुणमित्र’ के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज उनके काम की पहचान है।
