डॉ लहरी राम मीणा को मिलेगा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार सम्मान
वाराणसी। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल ने आलोचक, कवि एवं रंगचिंतक डॉ. लहरी राम मीणा को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित ‘अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
उन्हें यह सम्मान उनकी चर्चित कृति ‘सृजन के विविध रूप और आलोचना’ के लिए प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के जनसंपर्क कार्यालय ने शनिवार को दी।
ये खबर भी पढ़े : शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म, तीन साल तक बनाता रहा संबंध, मोहनलालगंज पुलिस ने आरोपी को दबोचाबताया गया कि इस सम्मान के अंतर्गत डॉ. मीणा को एक लाख रुपये की मानद राशि, सम्मान-पत्र, प्रतीक-चिह्न एवं उत्तरीय भेंट किया जाएगा। अकादमी ने हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक एवं उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया है।
डॉ. लहरी राम मीणा की अब तक प्रकाशित प्रमुख कृतियों में ‘साहित्य का रंगचिंतन’, ‘आलोचना का जनतंत्र’, ‘सृजन के विविध रूप और आलोचना’, ‘लक्ष्मीनारायण लाल विनिबंध’, ‘हिन्दू संस्कृति और सत्तावादी राजनीति’, ‘जिस उम्मीद से निकला’ तथा ‘यह महज़ शब्द नहीं है’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
हिन्दी साहित्य, आलोचना और रंगमंच अध्ययन के क्षेत्र में उनके योगदान को पहले भी देश की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में डॉ. मीणा इक्कीसवीं सदी के हिन्दी नाटकों पर शोध एवं अध्ययन कार्य में संलग्न हैं।
डॉ. मीणा इन दिनों काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके इस सम्मान की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय परिसर सहित साहित्यिक जगत और क्षेत्रीय बुद्धिजीवी वर्ग में हर्ष का वातावरण है।
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