ओबरा डी एवं अनपरा ई परियोजनाओं को उत्पादन निगम को सौंपने की मांग

40 माह बाद भी कार्य प्रारंभ न होना गंभीर विषय : उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेकर बिजली कर्मियों का सहयोग ले प्रबंधन

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि प्रदेश के ऊर्जा हितों को ध्यान में रखते हुए ओबरा डी (2×800 मेगावाट) एवं अनपरा ई (2×800 मेगावाट) ताप विद्युत परियोजनाओं को एनटीपीसी के साथ प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर व्यवस्था से मुक्त कर तत्काल उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि फरवरी 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान इन दोनों परियोजनाओं के लिए एनटीपीसी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि 40 माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परियोजनाओं के निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। न तो निर्माण कार्य शुरू हो सका है और न ही आवश्यक कोयला लिंकेज की व्यवस्था हो पाई है।

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संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाएं एनटीपीसी की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) से कोल पिटहेड लिंकेज प्राप्त न होने के कारण ये परियोजनाएं व्यावसायिक दृष्टि से कम आकर्षक हो गई हैं। यही कारण है कि लंबे समय के बाद भी इन परियोजनाओं पर कोई उल्लेखनीय प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

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संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि परियोजनाओं में हो रही अनावश्यक देरी के कारण उनकी लागत लगातार बढ़ रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो लागत वृद्धि (कॉस्ट ओवररन) के कारण प्रदेश को भविष्य में महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं और राज्य सरकार दोनों पर पड़ेगा।

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संघर्ष समिति ने कहा कि सामान्यतः किसी ताप विद्युत परियोजना का निर्माण पांच वर्षों में पूरा हो जाता है, लेकिन यहां 40 माह बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभ न होना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। प्रदेश सरकार को अब इस पूरे मामले की समीक्षा करते हुए वैकल्पिक निर्णय लेना चाहिए।

संघर्ष समिति का मत है कि यदि इन परियोजनाओं को राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंप दिया जाए तो ओबरा और अनपरा में पहले से उपलब्ध आधारभूत संरचना तथा साझा सुविधाओं का उपयोग करके बिजली उत्पादन लागत में 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी लाई जा सकती है। इससे प्रदेश को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराना संभव होगा।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि यदि एक ही परिसर में अलग-अलग स्वामित्व वाली उत्पादन परियोजनाएं संचालित की जाती हैं तो भविष्य में अनेक परिचालन एवं कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से कोयला परिवहन, रेलवे साइडिंग के उपयोग तथा ऐश डिस्पोजल जैसी व्यवस्थाओं को लेकर विवाद पैदा होने की आशंका है। वर्तमान में उपलब्ध सीमित रेल अवसंरचना तथा साझा ऐश पोंड भविष्य में गंभीर बाधा बन सकते हैं।

संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से यह भी आग्रह किया कि वह बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ले। बिजली व्यवस्था में सुधार, नई उत्पादन परियोजनाओं के समयबद्ध निर्माण तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के लिए बिजली कर्मियों के अनुभव और सहयोग का सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए। 

संघर्ष समिति ने पुनः मांग की कि प्रदेश के व्यापक आर्थिक एवं ऊर्जा हितों को देखते हुए ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं से संबंधित ज्वाइंट वेंचर व्यवस्था को तत्काल समाप्त कर इन परियोजनाओं का निर्माण एवं संचालन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए, ताकि प्रदेश को समयबद्ध ढंग से सस्ती, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध हो सके।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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