मानसून की बेरुखी से चिंता बढ़ी, धान के खेतों में पानी का संकट
मानसून की बेरुखी से धान की खेती पर संकट, सिंचाई को जूझ रहे किसान
राहुल सिंह यादव
- रोपाई पूरी, अब फसल बचाने की जंग लड़ रहे किसान
लखनऊ। मानसून की बेरुखी और आसमान में छाए काले बादलों ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई महीना अंतिम पड़ाव की ओर है, लेकिन इंद्रदेव किसानों से रूठे नजर आ रहे हैं। महंगाई की मार के बीच कुछ गिने-चुने किसानों ने निजी संसाधनों से खेतों में पानी भरकर धान की रोपाई तो कर दी, लेकिन अब दोबारा खेतों में पानी डालना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद काले बादलों के बीच बारिश हो जाए।
जहां सिंचाई के निजी संसाधन और नहर का पानी उपलब्ध नहीं है, वहां के किसान पूरी तरह बारिश के सहारे बैठे हैं। किसान मनोहर लाल बताते हैं कि जुलाई में भारी बारिश की उम्मीद रहती है, लेकिन यह महीना भी किसानों को धोखा देता नजर आ रहा है। सामान्य तौर पर एक से 21 जुलाई के बीच करीब 70 से 80 प्रतिशत तक धान की रोपाई हो जाती है, लेकिन बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा है।
रोपे गए धान के खेतों में पानी का संकट

जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के संसाधन अथवा नहर का पानी उपलब्ध था, उन्होंने जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह में धान की रोपाई कर दी थी। अब इन खेतों में पानी का संकट खड़ा हो गया है। महंगाई के इस दौर में खेतों को पर्याप्त पानी दे पाना किसानों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इसके बावजूद फसल को बचाए रखने के लिए किसान किसी न किसी तरह सिंचाई की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
डीजल और बिजली की महंगाई ने बढ़ाई मुश्किल
किसानों का कहना है कि डीजल और बिजली की बढ़ती कीमतों ने सिंचाई का खर्च काफी बढ़ा दिया है। बारिश नहीं होने पर निजी संसाधनों से खेतों में पानी पहुंचाना किसानों की मजबूरी बन गया है। डीजल इंजन चलाने में बढ़ता खर्च और बिजली की महंगी सिंचाई ने किसानों की लागत बढ़ा दी है। ऐसे में किसान फसल बचाने के लिए सिंचाई तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उत्पादन लागत निकलने की भी चिंता सता रही है।
बारिश नहीं हुई तो फसल खराब होने की आशंका
क्षेत्र के किसान बेचालाल के पास आठ बीघा जमीन है। उन्होंने मुश्किल से तीन बीघा में धान की रोपाई की है। उनका कहना है कि बारिश नहीं होने से खेतों में पानी नहीं है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की फसल की बढ़वार प्रभावित होने के साथ ही उत्पादन पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
