विद्युत क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में एकजुट होने का आह्वान
पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने देशभर के पावर इंजीनियरों से जुड़े की अपील
- 54वें स्थापना दिवस पर सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था की रक्षा का संकल्प
लखनऊ। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के 54वें स्थापना दिवस पर फेडरेशन के चेयरमैन इं शैलेन्द्र दुबे एवं सेक्रेटरी जनरल इं पी रत्नाकर राव ने देशभर के पावर इंजीनियरों से एकजुट, सजग और तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक स्वरूप को कमजोर करने वाले प्रत्येक प्रयास का सभी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से विरोध किया जाएगा।
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के नेतृत्व ने कहा कि देश को वास्तविक, भारत-विशिष्ट एवं उपभोक्ता केंद्रित विद्युत सुधारों की आवश्यकता है, न कि सुधारों के नाम पर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निजीकरण की।
फेडरेशन ने विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025, सार्वजनिक क्षेत्र के डिस्कॉम के निजीकरण, टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन के निजीकरण, विद्युत क्षेत्र की मूल्यवान परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण तथा विद्युत उत्पादन, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, के बड़े पैमाने पर निजीकरण का कड़ा विरोध किया।
इं शैलेंद्र दुबे एवं इं पी रत्नाकर राव ने कहा कि भारत की विद्युत व्यवस्था का निर्माण दशकों से सार्वजनिक निवेश, सरकारी सहयोग, उपभोक्ताओं के योगदान और सार्वजनिक ऋण के माध्यम से हुआ है। ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क राष्ट्रीय परिसंपत्तियां हैं और इन्हें निजी कंपनियों के लिए केवल लाभदायक उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने का व्यावसायिक माध्यम नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि विद्युत वितरण में निजी कंपनियों को लाभदायक उपभोक्ताओं का चयन करने की अनुमति देने से सार्वजनिक डिस्कॉम पर कृषि, ग्रामीण, गरीब एवं रियायती उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। इससे सार्वजनिक विद्युत कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी, जबकि निजी कंपनियां सार्वजनिक धन से निर्मित बुनियादी ढांचे का लाभ उठाएंगी।
उन्होंने कहा कि एक ही सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर अनेक वितरण लाइसेंसधारियों को कार्य करने की अनुमति देना गंभीर चिंता का विषय है। विद्युत वितरण को ऐसे व्यावसायिक मॉडल में नहीं बदला जा सकता जिसमें निजी कंपनियां केवल लाभदायक उपभोक्ताओं को चुनें और सार्वजनिक डिस्कॉम सार्वभौमिक आपूर्ति, ग्रामीण विद्युतीकरण तथा कृषि एवं गरीब उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी उठाती रहें।
फेडरेशन ने ट्रांसमिशन परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर टी बी सी बी के उपयोग का भी विरोध किया। ट्रांसमिशन विद्युत व्यवस्था की रीढ़ तथा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। रणनीतिक ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों को दीर्घकालिक आधार पर निजी कंपनियों को सौंपना राज्य एवं केंद्रीय ट्रांसमिशन कंपनियों की भूमिका को कमजोर कर सकता है। फेडरेशन ने मांग की कि राज्य एवं केंद्रीय ट्रांसमिशन कंपनियों को पर्याप्त मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक, वित्तीय संसाधन एवं पेशेवर स्वायत्तता देकर मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि भूमि, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, सब-स्टेशन, विद्युत गृह और अन्य विद्युत परिसंपत्तियां रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्तियां हैं। इनका निर्माण देश की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया है। एसेट मॉनेटाइजेशन सार्वजनिक परिसंपत्तियों, राजस्व स्रोतों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निजी हाथों में सौंपने का पिछला दरवाजा नहीं बनना चाहिए।
फेडरेशन ने विद्युत उत्पादन, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते निजी नियंत्रण पर गंभीर चिंता व्यक्त की। नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख आधार बनने जा रही है। इसलिए देश में नवीकरणीय उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, ग्रिड एकीकरण एवं संबंधित बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत क्षमता विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत अपने भविष्य के ऊर्जा संसाधनों पर रणनीतिक नियंत्रण कमजोर करके सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादन कंपनियों को कमजोर करने का जोखिम नहीं उठा सकता। सुधारों का उद्देश्य विद्युत कंपनियों को वित्तीय रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम, पेशेवर, आधुनिक एवं उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह बनाना तथा विश्वसनीय, सस्ती और सार्वभौमिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना होना चाहिए।
फेडरेशन ने उपभोक्ता केंद्रित एवं कर्मचारी केंद्रित सुधारों की मांग की, जिनमें बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर युवा इंजीनियरों की भर्ती, तकनीकी मानव संसाधन को मजबूत करना, नेटवर्क का आधुनिकीकरण, परिचालन दक्षता बढ़ाना तथा सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र में उपलब्ध विशाल तकनीकी अनुभव का प्रभावी उपयोग शामिल है।
54वें स्थापना दिवस पर इं शैलेन्द्र दुबे एवं इं पी रत्नाकर राव ने देश के सभी पावर इंजीनियरों से एकजुट होकर निम्न के विरुद्ध सतत लोकतांत्रिक संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया:- विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025, सार्वजनिक क्षेत्र के डिस्काॅम का निजीकर- सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था को कमजोर करने वाले समानांतर/बहु-वितरण लाइसेंस, टी बी सी बी के माध्यम से ट्रांसमिशन का निजीकरण- सार्वजनिक विद्युत परिसंपत्तियों का बड़े पैमाने पर मुद्रीकरण एवं हस्तांतरण और- विद्युत उत्पादन, विशेषकर नवीकरणीय उत्पादन, का बड़े पैमाने पर निजीकरण
उन्होंने कहा कि फेडरेशन विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक स्वरूप की रक्षा के लिए पावर इंजीनियरों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं, किसानों और समाज के अन्य वर्गों को साथ लेकर अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा।
54वें स्थापना दिवस पर फेडरेशन ने पुनः संकल्प लिया कि सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था की रक्षा, उपभोक्ता हितों की सुरक्षा, कर्मचारियों के हितों का संरक्षण तथा राष्ट्रीय विद्युत परिसंपत्तियों के निजीकरण का विरोध पूरी दृढ़ता से जारी रहेगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
