मोर मुकुट, बांसुरी और पीतांबर में सजे नन्हे कान्हा, टाउन हॉल में दिखा बाल गोकुलम्
देवरिया। टाउन हॉल प्रेक्षागृह रविवार को उस समय वृंदावन सा नजर आया, जब मोर मुकुट, बांसुरी और पीतांबर में सजे नन्हे कान्हा मंच पर उतरे। संस्कार भारती परिवार, देवरिया की ओर से आयोजित श्रीकृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता ‘बाल गोकुलम्’ में बाल-गोपालों की मनमोहक छटा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मासूम अदाओं और कृष्ण के विभिन्न बाल स्वरूपों पर पूरा परिसर तालियों और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
प्रतियोगिता दो आयु वर्गों में आयोजित हुई। शिशु वर्ग में एक से चार वर्ष तथा नटखट वर्ग में पांच से आठ वर्ष तक के बच्चों ने प्रतिभाग किया। आकर्षक वेशभूषा में सजे बच्चों ने मंच पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप को जीवंत कर दिया। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र दिए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर उत्साहवर्धन किया गया।
निर्णायक मंडल में श्वेता राय, डॉ. वंदना त्रिपाठी और तूलिका चतुर्वेदी शामिल रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंवर विजय सिंह ने की। मुख्य अतिथि सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी तथा विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह, विहिप गोरक्ष प्रांत के प्रांत उपाध्यक्ष एवं केंद्रीय ट्रस्टी सदस्य उपेंद्र शाही, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुशील कुमार बरनवाल, प्रांतीय महामंत्री अनिल कुमार सिन्हा और मंत्री राणाप्रताप सिंह रहे।
संस्कार भारती के अध्यक्ष अरुण बरनवाल, संरक्षक डॉ. विपिन बिहारी शुक्ला समेत पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन रविकांत मणि त्रिपाठी एवं राजेंद्र प्रसाद जायसवाल ने किया।
अध्यक्ष अरुण बरनवाल ने कहा कि बाल गोकुलम् का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीकृष्ण की लीलाओं से परिचित कराना है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी संस्कृति से जुड़ने के साथ अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है।
मुख्य अतिथि डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में भारतीय संस्कृति, संस्कार और सनातन परंपराओं के प्रति रुचि बढ़ाते हैं। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए इस तरह के आयोजन निरंतर होने चाहिए।
कार्यक्रम में शशांक मणि, कृष्ण मोहन गुप्ता, अटल बरनवाल, पूनम मणि त्रिपाठी, नित्यानंद यादव, अनामिका बरनवाल, नवनीत बरनवाल, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, यशोदा जायसवाल, पुष्पा बरनवाल, कंचन बरनवाल, कपिल सोनी, अतुल बरनवाल, अमन अग्रवाल, अजित मिश्रा, बैजनाथ रौनियार, प्रांशु बरनवाल और रामकुमार बरनवाल सहित संस्था के सदस्यों का सहयोग रहा।
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