आयुष्मान: गलत बिल लगाने पर होगी कार्रवाई
लाभार्थी से हो सकती है दस गुना वसूली
लखनऊ। प्रदेश सरकार रेवड़ियों की तरह हर किसी को आयुष्मान की सुविधा दे रही है। इसी कारण यूपी में करीब 6 करोड़ लोगों का पांच लाख तक का नि:शुल्क इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बना दिया गया है। अब इसके दुरुपयोग की खबरे आ रही है। इसे लेकर केन्द्र सरकार ने बिना इलाज एवं गलत बिल लगाकर भुगतान लेने वालों एवं लाभार्थी पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
आयुष्मान योजना को लेकर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने बताया कि नियमों का उल्लंघ करने, लाभार्थी से अवैध वसूली, बिना इलाज के बिल लगाना, गलत लाभार्थी के नाम पर इलाज दर्ज करना, अनावश्यक इलाज या तय मानकों का पालन नहीं करने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिदेर्शों की जानकारी दी जा रही है। सरकार का प्रयास है कि अस्पताल पहले से ही नियमों को समझें और अपने स्तर पर कमियों को दूर करें, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पताल कार्यप्रणाली संबंधी दिशानिर्देश बेबसाइड पर डाउनलोड कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों को अपने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिलिंग कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन नियमों की जानकारी देनी होगी। पहली बार नियम तोड़ने पर राशि का पूर्ण रिफंड तथा अवैध भुगतान की राशि का पांच गुना दंड वससूला जायेगा। दोबारा उल्लंघन पर क्लेम निरस्तीकरण एवं चिकित्सालय का निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंटब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है। सचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों से आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिदेर्शों को अपने दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की अपील की है। प्रत्येक चिकित्सालय अपने स्तर पर सुनिश्चित करें कि चिकित्सकीय, नर्सिंग, बिलिंग एवं प्रशासनिक स्टाफ को योजना के सभी नियमों की जानकारी होनी चाहिए।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
