लखनऊ में तीन दिन चला आतंकरोधी मॉक ड्रिल
NSG, ATS और लखनऊ पुलिस ने मिलकर परखी सुरक्षा व्यवस्था, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का किया अभ्यास
लखनऊ। लखनऊ कमिश्नरेट के तहत 16, 17 और 18 सितंबर 2026 को प्रतिष्ठित संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में संयुक्त रूप से आतंकरोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), एटीएस, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन के साथ विभिन्न सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत एवं व्यवस्थित करना तथा किसी भी आतंकी घटना या आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को परखना रहा।
मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, प्रतिक्रिया समय कम करने और आम जनता में सुरक्षा को लेकर विश्वास मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था परखी
अभ्यास के पहले चरण में विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों और प्रतिष्ठानों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से आकलन किया गया। सरकारी भवनों, अस्पतालों, परिवहन केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा में संभावित कमजोरियों की पहचान करते हुए जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षा ऑडिट किया गया। इसके आधार पर आवश्यक एहतियाती सुरक्षा उपायों की समीक्षा की गई।
फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका का अभ्यास
मॉक ड्रिल में घटना की पहली सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस की भूमिका और जिम्मेदारियों का भी अभ्यास किया गया। घटनास्थल को सुरक्षित करने के लिए परिधीय घेरा बनाने, अनधिकृत प्रवेश रोकने, भीड़ की आवाजाही नियंत्रित करने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कार्रवाई का पूर्वाभ्यास किया गया।

आपातकालीन सेवाओं के लिए घटनास्थल तक स्पष्ट रास्ता बनाए रखने तथा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ ज्वाइंट इंसिडेंट कमांड पोस्ट (JICP) स्थापित करने का भी अभ्यास किया गया। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, एसडीआरएफ, ट्रैफिक पुलिस, खुफिया एजेंसियों और संबंधित संस्थानों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच रियल टाइम समन्वय को भी परखा गया।
NSG और ATS की तैनाती का अभ्यास
सिम्युलेटेड खतरे की स्थिति के अनुसार NSG और ATS की तैनाती से संबंधित प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया। स्थानीय पुलिस ने विशेष बलों के निर्बाध आवागमन के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का भी पूर्वाभ्यास किया। इसके तहत पायलट एस्कॉर्ट और रियल टाइम ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था को परखा गया, ताकि विशेष बलों को घटनास्थल तक जल्द पहुंचाया जा सके और जरूरत पड़ने पर घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सके।
अफवाह और भीड़ नियंत्रण पर भी फोकस
मॉक ड्रिल के दौरान आसपास के यातायात मार्गों और भीड़ की आवाजाही को व्यवस्थित करने का अभ्यास किया गया, ताकि किसी आपात स्थिति में लोगों में अनावश्यक भय या अफरातफरी न फैले। सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए अफवाह नियंत्रण की प्रक्रिया का भी सिमुलेशन किया गया। इसके तहत अधिकृत प्रवक्ताओं के माध्यम से त्वरित और आधिकारिक सूचनाएं जारी करने की व्यवस्था का अभ्यास हुआ।
बंधक स्थिति और सर्च ऑपरेशन का किया गया सिमुलेशन
तीन दिवसीय अभ्यास के दौरान बंधक बनाए जाने की स्थिति, सर्च ऑपरेशन और सामरिक बचाव अभियान जैसे विभिन्न वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित परिदृश्यों का सिमुलेशन किया गया। NSG, ATS, लखनऊ पुलिस, फायर सर्विस, ट्रैफिक पुलिस, SDRF और मेडिकल टीमों ने आपसी समन्वय के साथ अभ्यास किया।
लखनऊ कमिश्नरेट के अनुसार, इस संयुक्त मॉक ड्रिल से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और आपात स्थिति में प्रभावी कार्रवाई की तैयारियों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
