अलीगंज अग्निकांड की हुई सुनवाई : एलडीए कोर्ट ने फैसला किया सुरक्षित
दो ताल के लिए नक्शा हुआ पास,खुद बना लिया तीसरा तल
20 मीटर का बेसमेंट बनाना था,बना दिया 134 मीटर
- अवैध निर्माण के हिस्से को खुद गिराने को तैयार हुआ मालिक
- मकान मालिक का कहना गलती किरायेदारों की है
लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड मामले की तीसरे दिन एलडीए की विहित प्राधिकारी कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान बिल्डिंग मलिक के वकील की ओर से यह पक्ष रखा गया कि बिल्डिंग में जो भी निर्माण अवैध है, उसको वह स्वयं अपने खर्चे पर गिरा लेंगे। नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र पास कर दिया जाए। एलडीए के वकील ने बताया कि बिल्डिंग के निर्माण के लिए दो तालों का नक्शा पास था,जबकि मौके पर तीन ताल बनाये गए हैं। जबकि बेसमेंट 20 मीटर का बेसमेंट बनना था,जिसे बढ़ाकर 134 मीटर कर दिया गया।
वकीलों ने कोर्ट को यह भी बताया कि बिल्डिंग में किराएदार की ओर से संचालित की जा रही थी बिल्डिंग मालिक का इसमें कोई दोष नहीं है। वकीलों ने एलडीए की नोटिस पर भी यह सवाल उठाया की नोटिस में यह जानकारी नहीं दी गई की मौके पर कितना निर्माण अवैध है। वकीलों की बात सुनने के बाद प्राधिकारी ने एलडीए के जेई से जानकारी ली।
जेई ने कोर्ट को बताया कि बेसमेट सहित दो फ्लोर का नक्शा पास था, लेकिन तीसरा तल पूरी तरह अवैध है। यह भी बताया कि 20 मीटर बेसमेंट पास था और 134 मीटर बनाया गया है। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद विधित प्राधिकारी ने आदेश को रिजर्व पर लिया है। ऐसे में अब यह एक-दो दिन बाद साफ होगा की बिल्डिंग पर बुलडोजर चलेगा या या शमन मानचित्र पास करने की कार्यवाही की जाएगी। यह मामला 22 जून को हुए उस भीषण अग्निकांड से जुड़ा है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए की जांच में भवन निर्माण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके आधार पर भवन स्वामी को नोटिस जारी किया गया था।
ये खबर भी पढ़े : राम मंदिर प्रकरण में दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई, विपक्ष राजनीति न करे : पंकज चौधरीमामले की जांच कर रही एसआईटी की पड़ताल में भी लगातार नई लापरवाहियां सामने आ रही हैं। जांच में पता चला है कि जहां भवन में फायर एग्जिट और लोहे की सीढ़ियां होनी चाहिए थीं, वहां लिफ्ट लगा दी गई थी। इसके अलावा भवन में स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड का इस्तेमाल और मानचित्र के विपरीत अतिरिक्त निर्माण भी जांच में सामने आया है।
एलडीए पहले ही भवन निर्माणकर्ताओं पर करीब 91.25 लाख रुपए का दंड और 50 हजार रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगा चुका है। साथ ही भवन से जुड़े 18 इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी एसआईटी के जांच दायरे में है। अब सबकी नजर गुरुवार को आने वाले एलडीए कोर्ट के फैसले पर है। यदि कोर्ट ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रखती है तो अग्निकांड के बाद यह इस मामले की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
