- 32 दिन बाद एक्शन में दिखा एलडीए
लखनऊ। शनिवार अलीगंज क्षेत्र में एलडीए ने बिल्डिंग को ढहने का काम शुरू कर दिया। इससे पहले एलडीए ने बिल्डर को खुद ही अवैध ढांचा गिराने के आदेश दिए थे। एलडीए के निर्धारित समय देने के बावजूद जब बिल्डर ढांचा गिराने में असक्षम रहा। जिसके बाद शनिवार ने भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में पोकलैंड और ट्रक चलाकर अवैध ढांचे को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बिल्डिंग का चालीस फीसदी हिस्सा एलडीए ने शनिवार ढहा दिया।
दरअसल, 22 जून को इस बिल्डिंग में भीषण आग लग गई थी। सेकंड फ्लोर में एनिमेशन कोचिंग में 15 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 5 लोगों ने किसी तरह पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई थी। आग लगने के दौरान एक युवक सेकंड फ्लोर से कूद गया था, उसका पैर पैरालाइज हो गया था। हादसे के बाद एलडीए ने जांच की तो बिल्डिंग अवैध थी। रिहायशी बिल्डिंग को कॉमर्शियल में बदल दिया गया था। इसके बाद एलडीए ने मालिक को अवैध निर्माण का नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा था। 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करते हुए 15 दिन के भीतर खुद इमारत गिराने के आदेश दिए थे।
डेडलाइन शुक्रवार को खत्म हो गई, जिसके बाद एलडीए ने खुद बुलडोजर चलाकर कार्रवाई शुरू की। शनिवार सुबह 7:30 बजे एलडीए के 45 अफसर और कर्मचारी 3 बुलडोजर और एक हाइड्रोलिक मशीन लेकर मौके पर पहुंचे। अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। आसपास की सड़कों को बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया। 100 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए। इसके बाद बिल्डिंग को गिराना शुरू किया। शाम 7 बजे तक बिल्डिंग का 40 फीसदी हिस्सा तोड़ डाला गया।
पूरी इमारत को जमींदोज करने में रातभर का समय और लग सकता है। बुलडोजर एक्शन के बीच ही बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला के वकील राजेंद्र शुक्ला मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि एलडीए ने 25 जुलाई तक का वक्त दिया था। फिर उसी दिन कार्रवाई करने कैसे पहुंच गए? ध्वस्तीकरण का कोई अलग आदेश उन्हें नहीं मिला। सिर्फ नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई को अदालत में चुनौती देंगे।