कार्डियक रिहैबिलिटेशन में आयुर्वेद की सहायक भूमिका : डा संजीव

— आयुर्वेदिक उपचार से रोगी की हृदय क्षमता में सुधार : डा संजीव

Published By Shubham Kashyap
On
Shubham Kashyap Picture

लखनऊ। हृदयाघात के बाद रोगियों के पुनर्वास में आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद को सहायक उपचार के रूप में सम्मिलित करने की संभावनाओं पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन (एल्सेवियर) में प्रकाशित हुआ है। ये जानकारी डा संजीव रस्तोगी ने दी।
उन्होंने बताया यह शोध राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, लखनऊ के काय चिकित्सा एवम गठिया विभाग के पूर्व प्रमुख डा संजीव रस्तोगी, राजकीय दून मेडिकल कालेज, देहरादून के शाश्वत रस्तोगी और हेयरफील्ड हॉस्पिटल एवं नेशनल हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट, इम्पीरियल कॉलेज, लंदन  के डॉ. तरुण मित्तल के सहयोग से किया गया।
डा संजीव रस्तोगी ने बताया कि अध्ययन में 46 वर्षीय एक ऐसे रोगी का विवरण प्रस्तुत किया गया है, जिसे गंभीर हृदयाघात के बाद हृदय की पम्पिंग क्षमता केवल 25–30 प्रतिशत रह गई थी। तीन माह तक आधुनिक चिकित्सा एवं मानक कार्डियक रिहैबिलिटेशन के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद आधुनिक उपचार जारी रखते हुए चिकित्सकीय देखरेख में आयुर्वेदिक औषधियों व 'ॐ' जप को सहायक उपचार के रूप में जोड़ा गया। 
लगभग आठ माह तक इस समन्वित  उपचार के बाद रोगी की हृदय की पम्पिंग क्षमता बढ़कर 45–50 प्रतिशत हो गई। साथ ही अत्यधिक थकान, कमजोरी तथा दैनिक कार्य करने में होने वाली कठिनाई में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। उपचार के दौरान किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव भी सामने नहीं आया।
डॉ. संजीव रस्तोगी ने कहा कि हृदयाघात के बाद रोगियों में पुनः हृदयाघात, हृदय की कार्यक्षमता में कमी तथा समयपूर्व मृत्यु का जोखिम बना रहता है। आधुनिक चिकित्सा इस उपचार की आधारशिला है, किंतु यदि वैज्ञानिक आधार पर आयुर्वेद को सहायक चिकित्सा के रूप में सम्मिलित किया जाए तो पुनर्वास की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह अध्ययन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक वैज्ञानिक संकेत प्रस्तुत करता है। यह शोध आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के वैज्ञानिक समन्वय के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है और हृदयाघात के बाद रोगियों के पुनर्वास पर भविष्य के अनुसंधानों के लिए नई दिशा प्रदान करता है ।

 
 

लेखक के बारे में

Shubham Kashyap Picture

शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

नवीनतम

लॉन्ड्री में धुले हुए कपड़ों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एआई-आधारित दाग पहचान पायलट परियोजना आरंभ की गई 

सभी मशीनीकृत लॉन्ड्री में प्रभावी लिनेन सफाई सुनिश्चित करने के लिए व्हाइटो-मीटर का उपयोग किया जाता है; लॉन्ड्री संचालन की...
उत्तर प्रदेश 
लॉन्ड्री में धुले हुए कपड़ों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एआई-आधारित दाग पहचान पायलट परियोजना आरंभ की गई 

मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड में समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग स्थापित किए गए: रेल मंत्री

सम्पूर्ण यात्रा के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों में ऑन बोर्ड...
उत्तर प्रदेश 
मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड में समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग स्थापित किए गए: रेल मंत्री

थाना खीरी पुलिस का वारंटी गिरफ्तारी अभियान सफल,पांच आरोपी गिरफ्तार

लखीमपुर-खीरी,24 जुलाई(तरुणमित्र)। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के निर्देशन में जनपद में अपराधियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए...
उत्तर प्रदेश 
थाना खीरी पुलिस का वारंटी गिरफ्तारी अभियान सफल,पांच आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश

लॉन्ड्री में धुले हुए कपड़ों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एआई-आधारित दाग पहचान पायलट परियोजना आरंभ की गई 

सभी मशीनीकृत लॉन्ड्री में प्रभावी लिनेन सफाई सुनिश्चित करने के लिए व्हाइटो-मीटर का उपयोग किया जाता है; लॉन्ड्री संचालन की...
उत्तर प्रदेश 
लॉन्ड्री में धुले हुए कपड़ों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एआई-आधारित दाग पहचान पायलट परियोजना आरंभ की गई 

मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड में समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग स्थापित किए गए: रेल मंत्री

सम्पूर्ण यात्रा के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों में ऑन बोर्ड...
उत्तर प्रदेश 
मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड में समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग स्थापित किए गए: रेल मंत्री