कोर्ट से फटकार के बाद अफजाल अंसारी को वापस मिला लखनऊ वाला बंगला
लखनऊ। लखनऊ के डाली बाग स्थित अपने बंगले पर कब्जा लेने दोनों बेटियों के साथ पहुंचे सांसद अफजाल अंसारी। पूर्व सांसद स्वा0 मुख्तार अंसारी के सांसद भाई अफजाल अंसारी को लखनऊ वाला बंगला वापस मिल गया है। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर होने के बाद बुधवार को लखनऊ निगर निगम ने बंगले की चाबी अफजाल अंसारी को सौंप दी। वह बेटियों के साथ बंगले पर कब्जा लेने पहुंचे तो सभी के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। डाली बाग इलाके में स्थित यह बंगला भी गैंगस्टर एक्ट में केस के बाद कुर्क कर लिया गया था। इसके कारण करीब छह वर्षों से बंगला बंद था। बंगले पर कब्जा लेने के साथ ही इसकी साफ सफाई शुरू करा दी गई। भूखंड संख्या 14-बी पर करीब 6,700 वर्ग फुट में बना यह बंगला अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज है।
प्रशासन ने वर्ष 2020 में आपराधिक मामलों के आधार पर इस बंगले को भी कुर्क कर सील कर दिया था। नगर निगम बंगले का केयरटेकर बना। इसके खिलाफ अफजाल अंसारी हाईकोर्ट पहुंचे थे। अदालत ने चाबी लौटाने का आदेश दिया, लेकिन कुर्की समाप्त नहीं हुई। इसके बाद अवमानना याचिका दाखिल हुई। बाद में जिलाधिकारी गाजीपुर ने सुनवाई के बाद संपत्ति को कुर्की से मुक्त करने का आदेश दिया। इसी के बाद नगर निगम को चाबी सौंपने के निर्देश मिले। अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने बुधवार को परिजनों को चाबी दिलवाई।
दरअसल गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में इस बंगले को भी कुर्क किया गया था। गाजीपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 23 अक्तूबर 2022 को इसे बेनामी संपत्ति मानते हुए कुर्की का आदेश दिया था। कुर्की के बाद गाजीपुर जिलाधिकारी ने इसकी देखरेख के लिए लखनऊ नगर निगम को सौंप दिया था। तब से यह बंगला नगर निगम के पास ही थी। अफजाल पर आरोप था कि उन्होंने संगठित अपराध से अर्जित धन से यह संपत्ति 1998 में पत्नी फरहत अंसारी के नाम ली थी।
विशेष कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
अफजाल अंसारी के परिवार ने कुर्की के खिलाफ जिला जज कोर्ट और फिर एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में अपील की थी। स्पेशल कोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को कुर्की आदेश रद्द कर संपत्ति मुक्त करने का आदेश दिया। शासन ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को पांच हफ्ते में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया था। इसी क्रम में जिलाधिकारी गाजीपुर अनुपम शुक्ला ने 18 अगस्त को कुर्की समाप्त करने का आदेश जारी किया था।
बंधे वाले गेट से दिया गया कब्जा
अफजाल अंसारी का यह बंगाल जब सील किया गया था, तब उसका मुख्य गेट डालीबाग की ओर था। कोठी में दो अन्य गेट पीछे हैदर कैनाल बंधे की ओर भी हैं। करीब डेढ़ साल पहले बगल में ही मुख्तार की जमीन भी थी। एलडीए ने इसे नजूल की जमीन मानते हुए कब्जा ले लिया था और वहां सरदार बल्लभ भाई पटेल आवासीय योजना लाई गई थी। इसके तहत 72 फ्लैट बने हैं। इस योजना की बाउंड्री के कारण कोठी का मुख्य गेट अब घिर गया है। ऐसे में बिना दीवार तोड़े मुख्य गेट से अंदर जाना संभव नहीं था। ऐसे में बंधे वाली रोड के गेट से कब्जा दिया गया और वहां का मलबा भी साफ कराया गया।
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