पंजाब में नशे का मुद्दा उठाने वाले किसान की मौत के बाद बढ़ा तनाव
अस्पताल में पुलिस बल तैनात
- पुलिस ने आरोपों से किया इनकार, सरपंच समेत तीन के खिलाफ मामला दर्ज
संगरूर। पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सवाल उठाने वाले 50 वर्षीय गुलजार सिंह की मौत के बाद मंगलवार को संगरूर के अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान अस्पताल और आसपास के क्षेत्र में 100 से अधिक पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। गांव के लोगों और स्थानीय निवासियों के एकत्र होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
गुलजार सिंह ने पिछले सप्ताह दिड़बा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नशीले पदार्थों की बिक्री का मुद्दा उठाया था। वायरल हुए एक वीडियो में उन्होंने अपने बेटे के नशे का आदी होने और नशे की आसानी से उपलब्धता पर चिंता जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद गुलजार सिंह पर दबाव बनाया गया और उन्हें पुलिस की ओर से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने प्रताड़ना और यातना के आरोपों से इनकार किया है तथा मामले की जांच जारी होने की बात कही है।
गुलजार सिंह को पहले दिड़बा के अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें पटियाला के राजिंदरा अस्पताल और बाद में बेहतर उपचार के लिए लुधियाना ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस घटना से कुछ दिन पहले नशा विरोधी कार्यकर्ता मोहनजीत सिंह ने भी सुनाम में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान काला झंडा दिखाने के बाद पुलिस यातना के आरोप लगाए थे। इन घटनाओं को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ना के आरोप में एक सरपंच तथा दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मृतक ने अपने शुरुआती बयान में गांव के सरपंच और दो अन्य लोगों के नाम लिए थे। पटियाला रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक कुलदीप सिंह चहल ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद गुलजार सिंह का पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
