लखीमपुर-खीरी,08 सितम्बर(तरुणमित्र)। आसमान से बरसी महज एक घंटे की बारिश ने लखीमपुर शहर की जल निकासी व्यवस्था के दावों की कलाई खोल दी। अस्पताल रोड से लेकर स्टेट बैंक क्षेत्र और थरवरनगंज तक सड़कों पर पानी का सैलाब नजर आया। शहर का प्रमुख खपरैला बाजार भी जलभराव से अछूता नहीं रहा। कई जगह घुटनों तक पानी भर गया और दुकानदारों को अपने सामान की सुरक्षा के लिए जूझना पड़ा। बारिश थमी तो शहर की सड़कों पर पानी जमा रहा और व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े होते रहे। खपरैला बाजार में जलभराव के कारण कपड़ा, किराना, जूते-चप्पल और चूड़ी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गईं। स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक नालियां जाम होने के कारण पानी दुकानों के भीतर तक पहुंच गया। ग्राहकों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
हर बारिश में वही कहानी,आखिर कब बदलेगा लखीमपुर का मंजर?
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बारिश के दौरान हर वर्ष इसी तरह जलभराव की स्थिति बनती है। नालों की सफाई और जल निकासी को लेकर किए जाने वाले दावों के बावजूद बारिश होते ही सड़कों पर पानी जमा हो जाता है।
नाला चौड़ीकरण के दावे, फिर भी जलभराव?
थरवरनगंज में नगर पालिका परिषद द्वारा शुरू कराए गए नाला चौड़ीकरण कार्य ने भी अब सवालों का रूप ले लिया है। जल निकासी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस काम के बावजूद कई माह बाद भी कुछ हिस्सों में निर्माण अधूरा होने की बात सामने आ रही है। पूर्व विधायक आरए उस्मानी के आवास वाली गली के आसपास नाला चौड़ीकरण का काम अधूरा बताए जाने के साथ ही थरवरनगंज में जेल की दीवार के पास भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। स्थानीय शिकायत के मुताबिक चौड़ीकरण के दौरान नाले से हटाए गए पत्थर लंबे समय बाद भी वापस नहीं लगाए गए हैं।
खुला नाला बना खतरा,जिम्मेदारों की निगाह कब पड़ेगी?
घनी आबादी के बीच खुले नाले को लेकर स्थानीय लोगों में सुरक्षा की चिंता है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं के नाले में गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल सीधा है—यदि नाला चौड़ीकरण विकास कार्य है तो सुरक्षा इंतजाम अधूरे क्यों हैं? और यदि काम अधूरा है तो उसे पूरा करने में इतनी लंबी देरी क्यों?
फोन नहीं उठा, अब जवाब कौन देगा?
मामले में नगर पालिका प्रशासन का पक्ष जानने के लिए अधिशासी अधिकारी संजय सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि शहरवासियों को हर बरसात में जलभराव की समस्या से आखिर कब स्थायी राहत मिलेगी?
क्या अधूरा नाला चौड़ीकरण पूरा होगा, क्या खुले नाले को सुरक्षित किया जाएगा,क्या नालियों पर हुए अतिक्रमण हटेंगे और सबसे बड़ा सवाल—जल निकासी व्यवस्था की इस बदहाली की जवाबदेही आखिर तय कब होगी?
बारिश ने सिर्फ शहर को पानी-पानी नहीं किया, बल्कि जल निकासी व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत भी सामने रख दी। अब निगाहें नगर पालिका प्रशासन पर हैं कि वह इस बार तस्वीरों और दावों से आगे बढ़कर जमीन पर स्थायी समाधान करता है या फिर अगली बारिश तक वही पुराना इंतजार जारी रहता है।