संजय गांधी नेशनल पार्क के अतिक्रमणकारियों को मिलेगा घर
मुंबई। संजय गांधी नेशनल पार्क और वन विभाग की जमीन पर बसे पात्र अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास की तैयारी तेज हो गई है। एक जनवरी 1995 से पहले के अतिक्रमणों को पात्र मानते हुए म्हाडा ने शिरढोण और खोणी में तैयार करीब 6,500 घर देने की तैयारी दिखाई है।
म्हाडा के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल वानखड़े के अनुसार इन घरों का खर्च राज्य सरकार को म्हाडा को देना होगा। म्हाडा के अनुसार, 6,500 घरों की अनुमानित कीमत करीब 1,000 से 1,100 करोड़ रुपये है। इस संबंध में जल्द ही राज्य सरकार के साथ बैठक होगी, जिसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य सरकार के साथ होने वाली बैठक के बाद पुनर्वास और घरों की व्यवस्था पर अंतिम फैसला होगा। लगभग 103 वर्ग किलोमीटर में फैले संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में लगभग 30 हजार अतिक्रमण बताए जाते हैं। संरक्षित क्षेत्र में पिछले तीन-चार दशकों से अतिक्रमण बढ़ने के कारण वन्यजीवों के अधिवास और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वन विभाग और राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन अब अतिक्रमण हटाने की दिशा में कार्रवाई कर रहे हैं।
हाल में म्हाडा के उपाध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल की मौजूदगी में म्हाडा और राष्ट्रीय उद्यान के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। उद्यान प्रशासन ने करीब 11 हजार घरों की मांग रखी थी। इसके जवाब में म्हाडा ने शिरढोण और खोणी में उपलब्ध करीब 6,500 घर देने की सहमति जताई है।
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