भोपाल में गरजे RSS सरकार्यवाह होसबाले, बोले- जागृत समाज ही भारत की शक्ति

लाल परेड ग्राउंड में संघ का विशाल स्वयंसेवक एकत्रीकरण में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- समाज अपनी शक्ति पहचाने, गांव से राष्ट्र तक जिम्मेदारी निभाए

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  • संघ के सरकार्यवाह होसबाले बोले-हर संकट के बाद उठ खड़ा हुआ भारत, जागृत समाज की शक्ति दिखाने का आह्वान

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पांच हजार वर्षों की सभ्यता यात्रा में भारत ने असंख्य संकटों और संघर्षों का सामना किया है। आक्रमण आए, सामाजिक चुनौतियां सामने आईं, लंबे संघर्ष और गुलामी का दौर भी आया, फिर भी भारत अपनी जीवंत सामाजिक चेतना के साथ खड़ा रहा। अब आवश्यकता उस सामर्थ्य को पहचानने और जागृत समाज के रूप में आगे बढ़ने की है।

सरकार्यवाह होसबाले रविवार को प्रदेश की राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल स्वयंसेवक एकत्रीकरण में स्वयंसेवकों को अपना पाथेय दे रहे थे। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में शासन और प्रशासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। गांव, बस्ती और मोहल्ले से लेकर राष्ट्र तक प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व को समझे और समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में योगदान दे।

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उल्लेखनीय है कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों से हजारों स्वयंसेवक शामिल हुए। कार्यक्रम में शारीरिक प्रदर्शन, संघ गीत और घोष वादन हुआ। एकत्रीकरण के माध्यम से भोपाल विभाग में नियमित रूप से संचालित शाखाओं के व्यापक स्वरूप को समाज के सामने रखा गया। संघ के सामाजिक कार्यों और आगामी संकल्पों का संदेश भी दिया गया।

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी जीवंत सामाजिक चेतना
सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि भारत को जमीन के एक भूखंड या राज्य व्यवस्था तक सीमित करके समझना उचित दृष्टि नहीं है। भारत एक जीवंत सभ्यता और समाज है, जिसने हजारों वर्षों की यात्रा में अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं। संघर्षों और आक्रमणों के बीच भी भारतीय समाज ने अपनी सांस्कृतिक निरंतरता कायम रखी। 

उन्होंने कहा कि इतिहास के लंबे दौर में समाज के भीतर कुछ कुरीतियां आईं। आपसी राग द्वेष बढ़ा और समाज अपनी शक्ति तथा पहचान को भूलता गया। ऐसे समय में समाज को अपने राष्ट्रीय भाव, सामाजिक दायित्व और अपनी आंतरिक शक्ति का स्मरण करना होगा।

सरकार्यवाह ने हनुमानजी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र पार करने की चुनौती सामने आने पर हनुमान अपनी शक्ति को भूल गए थे। जामवंत ने उन्हें उनकी सामर्थ्य का स्मरण कराया। इसी प्रकार समाज के भीतर मौजूद शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना के समय समाज की इसी शक्ति को जगाने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा, “किसी समाज के सामने समस्याएं आना स्वाभाविक है। असली प्रश्न यह है कि संकट के समय समाज में उसका सामना करने की क्षमता कितनी है। दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताएं आज इतिहास और संग्रहालयों तक सीमित हैं, जबकि भारत आज भी जीवंत समाज के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। भारत की यात्रा में आक्रमण, संघर्ष, सामाजिक शिथिलता और आपसी टकराव जैसे अनेक दौर आए। इन परिस्थितियों के बावजूद समाज ने अपनी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा। यही भारत की विशेषता है। समाज को अपनी आंतरिक शक्ति और सामर्थ्य को समझकर आगे बढ़ना होगा।”

गांव और बस्ती से शुरू हो राष्ट्र निर्माण
सरकार्यवाह ने कहा कि देश के लिए काम करने की शुरुआत गांव, बस्ती और मोहल्ले से होनी चाहिए। किसी क्षेत्र की समस्या का समाधान वहां रहने वाले लोगों की सक्रिय भागीदारी से अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है। उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय के विचारों का उल्लेख करते हुए गांवों में सभा, संवाद, शिक्षा, व्यायाम और सांस्कृतिक गतिविधियों की परंपरा को मजबूत करने की जरूरत बताई। 

उन्होंने कहा, “प्रत्येक गांव और बस्ती के लोगों को अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं पर विचार करना चाहिए। समाज के जीवन में रामायण, महाभारत, संतों की वाणी और गुरुओं के उपदेशों जैसे संस्कार देने वाले स्रोतों की चर्चा होनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से परिचित हो सके।”

असम की बाढ़ से मिला समाज की भागीदारी का संदेश
होसबाले ने असम में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए सेवा कार्यों में समाज की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सेवा भारती के स्वयंसेवक राहत कार्य के लिए पहुंचे। इस दौरान युवा, कॉलेज विद्यार्थी और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी प्रभावित लोगों की सहायता के लिए आगे आए। 

उन्होंने कहा, “संकट के समय सेवा का दायरा व्यापक होना चाहिए। समाज का प्रत्येक वर्ग आपदा और कठिन परिस्थितियों में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकता है। कोविड महामारी के दौरान भी स्वयंसेवकों के साथ समाज के अनेक लोगों ने सेवा कार्यों में भागीदारी की थी।”

जातिभेद और छुआछूत के खिलाफ व्यवहार में बदलाव पर जोर
सरकार्यवाह ने समाज के सामने पांच परिवर्तन के विचार को रखते हुए सामाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जन्म आधारित भेदभाव समाज की शक्ति को कमजोर करता है। जाति के आधार पर होने वाले दुर्व्यवहार को समाप्त करने की शुरुआत घर और व्यक्तिगत आचरण से होनी चाहिए। उन्होंने भगवान राम और शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार सामाजिक बदलाव विचारों के साथ व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा, “मंचों पर प्रस्ताव पारित करने से प्रकृति की रक्षा का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। घर, स्कूल, कार्यस्थल, बाजार, गली और बस्ती तक पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार पहुंचाना होगा। पौधारोपण के साथ ऊर्जा की खपत कम करने और प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की जरूरत है।” पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान उन्होंने किया।

होसबाले ने कहा कि देशभक्ति किसी विशेष राष्ट्रीय दिवस तक सीमित भाव नहीं है। नागरिकों को प्रतिदिन यह विचार करना चाहिए कि वे अपने गांव, मोहल्ले और समाज के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। संघ की शाखाओं के माध्यम से व्यक्ति निर्माण और समाज संगठन के प्रयास किए जाते हैं। भले ही समाज को संगठित करने का काम सरल दिखाई देता है, मगर इसे निरंतर निभाने के लिए अनुशासन और नियमितता चाहिए। रोज एक घंटा समाज के साथ जुड़ने और निस्वार्थ भाव से काम करने की भावना विकसित करने का आह्वान उन्होंने किया। उन्होंने कहा, देशभक्ति चौबीस घंटे की जिम्मेदारी है।

संगठन में शक्ति, जागृत समाज से प्रगति
सरकार्यवाह ने कहा कि जाति, पंथ, भाषा और प्रांत के आधार पर अलगाव समाज की सामूहिक शक्ति को प्रभावित करता है। संगठन की शक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अलग अलग उंगलियां सीमित शक्ति रखती हैं, मगर मुट्ठी बनने पर उनकी ताकत बढ़ जाती है। उन्होंने समाज के अलग अलग वर्गों के नेतृत्वकर्ताओं से साथ आने और सामूहिक प्रश्नों को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने का आह्वान किया। उनके अनुसार जागृत समाज देश की प्रगति में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि संघ के कार्य की यात्रा निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। व्यक्ति निर्माण और समाज संगठन के प्रयास लगातार चलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और विज्ञान, अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश की उपलब्धियों से विश्व में भारत के प्रति सम्मान और उत्सुकता बढ़ी है।

एम्स निदेशक बोले, संकट में इंसान का दुख सबसे बड़ा आधार
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि संकट के समय सहायता करते हुए पीड़ित की जाति, भाषा, क्षेत्र और धर्म से ऊपर उठकर उसके दुख को समझना चाहिए। उन्होंने इसे सेवा भावना का आधार बताया। कोतवाल ने भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व को परिवार के रूप में देखने की भारतीय दृष्टि मानवता के प्रति सम्मान की भावना पैदा करती है। राष्ट्रप्रेम अपनी संस्कृति और मातृभूमि से जुड़ाव के साथ मानवता के सम्मान का भाव भी रखता है।

युवा शक्ति को राष्ट्र और समाज के काम में लगाने का संदेश
कोतवाल ने युवाओं को भारत की बड़ी शक्ति बताते हुए स्वास्थ्य, अनुशासन और जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता का अर्थ ऊंचा पद हासिल करने तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देना भी उपलब्धि का महत्वपूर्ण रूप है। वहीं उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवार और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता तथा नागरिक कर्तव्य को महत्वपूर्ण विषय बताया। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण में जागरूक नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में मध्य भारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय, विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। विभाग कार्यवाह राधेश्याम मालवीय ने भोपाल विभाग में चल रही शाखाओं और आगामी कार्ययोजना का वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया।कार्यक्रम में भोपाल विभाग के हजारों स्वयंसेवकों की रही।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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