मप्र के मिनी जगन्नाथपुरी "मानोरा" में निकली भव्य रथयात्रा, 22 फीट रथ पर विराजे भगवान
यात्रा के दौरान सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
- जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना, उतारी आरती और की पुष्पवर्षा
विदिशा। मध्य प्रदेश में 'मिनी जगन्नाथपुरी' के नाम से प्रसिद्ध विदिशा जिले के मानोरा धाम में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। यहां भगवान जगदीश स्वामी, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 22 फीट ऊंचे दो मंजिला लकड़ी के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
मानोरा धाम में गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भगवान के विग्रहों को मंदिर के गर्भगृह से रथ पर विराजित किया गया। इसके बाद रथयात्रा पूरे गांव में निकली। रथयात्रा में शामिल होने और भगवान के दर्शन के लिए विदिशा सहित आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना की, आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
ये खबर भी पढ़े : राज्य वित्त आयोग आज जबलपुर दौरे पर, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ करेगा अहम बैठकमानोरा गांव को रंग-बिरंगी रोशनी, ध्वज-पताकाओं और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। सुबह शुरू हुई रथ यात्रा शाम करीब 5 बजे जनकपुरी पहुंचेगी, यहां रातभर विश्राम के बाद अगले दिन रथ को वापस मंदिर परिसर तक ले जाया जाएगा। पुलिस प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जा रही है। विदिशा से मानोरा तक जगह-जगह लोग श्रद्धालुओं की सेवा करते नजर आ रहे हैं। यहां तीन दिन तक मेला चलेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे।
मानोरा की यह रथयात्रा 200 साल से चली आ रही एक महत्वपूर्ण परंपरा है। मान्यता है कि जब ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में रथयात्रा के दौरान भगवान का रथ कुछ समय के लिए रुकता है, तब शंकराचार्य यह घोषणा करते हैं कि भगवान मानोरा धाम पधार गए हैं। इसी मान्यता के आधार पर यहां उत्सव की शुरुआत होती है, जिसमें श्रद्धालु तीन दिनों तक भगवान के दर्शन करते हैं।
मान्यता है कि करीब 200 वर्ष पूर्व मानोरा के भक्त मानकचंद्र और उनकी पत्नी पदमावती जगन्नाथपुरी गए थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें प्रतिवर्ष मानोरा आकर दर्शन देने का वचन दिया था। तभी से आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर यहां रथयात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है, जिसका पालन आज भी किया जाता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
