हिमाचल में टैक्सी परमिट 12 साल करने का विरोध, BMS ने उठाई मांग
शिमला। भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश ने टैक्सी परमिट की अवधि 15 साल से घटाकर 12 साल करने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
संघ का कहना है कि पड़ोसी राज्यों में टैक्सी परमिट की अवधि 20 से 25 साल तक है, ऐसे में हिमाचल में इसे घटाकर 12 साल करना टैक्सी ऑपरेटरों के हित में नहीं है।
संघ ने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने और वाहनों की उम्र के बजाय उनकी फिटनेस के आधार पर परमिट देने की मांग की है।
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा व महामंत्री यशपाल हेटा ने शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में यह बात कही।
संघ ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में टैक्सियों के परमिट की अवधि 20 से 25 साल तक है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में परमिट की अवधि 15 साल से घटाकर 12 साल करने का प्रस्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघ के अनुसार, जब कोई वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों को पूरा करता है तो उसकी उम्र के आधार पर उसे सड़क से हटाना उचित नहीं है।
भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि हिमाचल के टैक्सी ऑपरेटर प्रदेश को बड़ी मात्रा में राजस्व देते हैं और पर्यटकों को यात्रा की सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।
टैक्सी कारोबार से होटल, होम स्टे और ढाबों सहित पर्यटन से जुड़े दूसरे कारोबारों को भी काम मिलता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में युवा टैक्सी चलाकर स्वरोजगार कर रहे हैं।
संघ ने कहा कि एक टैक्सी ऑपरेटर अक्सर 15 से 20 लाख रुपये तक का कर्ज लेकर वाहन खरीदता है। परमिट की अवधि 12 साल होने पर वाहन मालिकों के सामने कर्ज चुकाने और समय से पहले नया वाहन खरीदने की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
संघ का कहना है कि 12 साल के अंतराल में नया वाहन खरीदना कई ऑपरेटरों के लिए मुश्किल होगा और इससे युवाओं के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
संघ ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी क्षेत्र को कमजोर करने के बाद अब टैक्सी क्षेत्र को भी प्रभावित करने वाले फैसले ले रही है।
संगठन ने इस प्रस्ताव से बड़ी कंपनियों और बाहरी ऑपरेटरों को फायदा होने की आशंका जताई है और कहा है कि स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से मांग की है कि हिमाचल में टैक्सी परमिट की अवधि 12 साल करने के प्रस्ताव को वापस लिया जाए और पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर इसे 20 से 25 साल किया जाए।
संघ ने टैक्सी ऑपरेटरों पर लगाए जा रहे अनावश्यक नियमों को वापस लेने और टैक्सी यूनियनों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर बातचीत करने की भी मांग की है।
संगठन ने कहा है कि टैक्सी वाहनों के लिए निश्चित 12 साल की आयु सीमा के बजाय वाहन की फिटनेस को परमिट का आधार बनाया जाना चाहिए।
संघ के महामंत्री यशपाल हेटा ने कहा कि सरकार को टैक्सी ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति और उनके परिवारों की निर्भरता को ध्यान में रखते हुए इस मामले में निर्णय लेना चाहिए।
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