शिमला पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नशा तस्करी से जुड़ी 70 लाख की अवैध संपत्ति फ्रीज
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच शिमला पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दो एनडीपीएस मामलों में लगभग 70 लाख रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियों को फ्रीज किया है।
यह कार्रवाई रामपुर उपमंडल से जुड़े दो मामलों में की गई है। पहला मामला 11 फरवरी 2025 को पुलिस थाना रामपुर में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार डिटेक्शन सेल रामपुर ने खुफिया सूचना के आधार पर किन्नौर जिले के निचार क्षेत्र के गांव बरी निवासी साहिल पुत्र पदम लाल के कब्जे से करीब छह ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद की थी।
मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने कथित ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला और पांच अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई।
इनमें रामपुर क्षेत्र के बठारा निवासी गोविन्द सिंह, झाकड़ी निवासी मनमोहन सिंह, चुहाबाग निवासी दीपक, डकोलर निवासी राकेश तथा पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के निवासी राकेश कुमार शामिल हैं।
पुलिस ने इन सभी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रही।
विस्तृत वित्तीय जांच के दौरान तीन आरोपियों की करीब 32 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियां चिन्हित की गईं, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि वे नशा तस्करी से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।
इनमें लग्जरी वाहन, 44.1 ग्राम सोना और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। इन सभी को कानून के तहत फ्रीज कर दिया गया है। दूसरा मामला रामपुर क्षेत्र के चेतन चौहान से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ पहले भी एनडीपीएस अधिनियम के तहत दो मामले दर्ज थे। इसके बाद उसके खिलाफ पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत निरोधात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया।
मंजूरी मिलने के बाद चेतन चौहान को 25 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में वह कैथू स्थित जिला उपकारागार में बंद है। चेतन चौहान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की।
जांच के दौरान करीब 38 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियां चिन्हित की गईं। इनमें एक ट्रक, एक कार, 74 ग्राम सोना, बैंक खाते और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। पुलिस ने इन संपत्तियों को भी फ्रीज करने की कार्रवाई की है।
इस तरह दोनों मामलों में कुल मिलाकर लगभग 70 लाख रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई है। पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित आरोपियों के पास आय का कोई ज्ञात और वैध स्रोत उपलब्ध नहीं था, जबकि उन्होंने पिछले लगभग छह वर्षों में बड़ी मात्रा में संपत्तियां अर्जित की थीं।
पुलिस का मानना है कि ये संपत्तियां नशा तस्करी से अर्जित धन से बनाई गईं। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने शनिवार को कहा कि नशा तस्करी के खिलाफ अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा।
उनके अनुसार वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में वित्तीय जांच के आधार पर चार मामलों में छह आरोपियों की कुल 1.83 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।
एसएसपी का कहना है कि नशा कारोबार के आर्थिक ढांचे को तोड़ने के लिए भविष्य में भी ऐसी वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई जारी रहेगी।
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