खतीबे आजम मस्जिद में 107वाँ वार्षिक शहादत-ए-इमाम हुसैन कार्यक्रम आयोजित,हज़ारों लोगों ने की शिरकत
मुजाहिद खां
रामपुर:मोहल्ला अंगूरी बाग स्थित मस्जिद ख़तीबे आज़म में 10 मुहर्रम के अवसर पर 107वाँ वार्षिक ज़िक्र-ए-शहादत कार्यक्रम अकीदत और एहतराम के साथ आयोजित किया गया।इस अवसर पर शहर और आसपास के क्षेत्रों से हज़ारों लोगों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ क़ारी अब्दुल करीम ख़ाँ फ़ुरक़ानी,क़ारी मोहम्मद आज़म फ़ुरक़ानी तथा क़ारी मोहम्मद मामून फ़ुरक़ानी की पवित्र क़ुरआन की तिलावत से हुआ।
इसके बाद मकर्रम नियाज़ी ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की।मौलवी मुशाहिद फ़ुरक़ानी और मकर्रम नियाज़ी ने हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शान में मनक़बत पेश कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।ख़ानदान-ए-ख़तीबे आज़म के युवा धर्मगुरु मौलवी मोहम्मद मआसिरुल्लाह ख़ाँ वजीही ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद की मृत्यु वास्तव में मृत्यु नहीं,बल्कि अपने रब से मिलने का सौभाग्य है।उन्होंने कहा कि यौमे आशूरा ने जहाँ अनेक नबियों को अल्लाह की विशेष नेमतें प्रदान कीं,वहीं हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु और अहले बैत की महान कुर्बानी ने इस दिन को हमेशा के लिए अमर बना दिया।
इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद मारिफुल्लाह ख़ाँ वजीही ने कहा कि मुहर्रम का महीना हमें हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की कुर्बानी और उनके संदेश की याद दिलाता है।कहा कि जो लोग दीन पर डटे रहते हैं,उन्हें अंततः अल्लाह कामयाबी और सम्मान प्रदान करता है।आज यदि दुनिया अमन और इंसानियत चाहती है तो उसे इमाम हुसैन की शिक्षाओं और उनके बलिदान के संदेश को अपनाना होगा।
मौलवी एतिसामुल्लाह ख़ाँ वजीही,नायब इमाम जामा मस्जिद ने कर्बला की घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास में कर्बला वह महान घटना है जिसने मुस्लिम समाज की सोच,सामाजिक जीवन और इतिहास को गहराई से प्रभावित किया।उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन की ज़िंदगी इस बात का प्रमाण है कि वास्तविक सफलता सत्ता प्राप्त करने में नहीं,बल्कि सत्य और न्याय के लिए अडिग रहने में है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए मौलवी अब्दुल वहाब ख़ाँ फ़ैज़ान वजीही,इमाम जामा मस्जिद ने अपने संबोधन में कहा कि पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अहले बैत और सहाबा-ए-किराम दोनों से मोहब्बत करने की शिक्षा दी है।उन्होंने कहा कि उम्मत की एकता और इस्लाम की मजबूती इसी में निहित है कि सभी का सम्मान किया जाए।
कार्यक्रम की परंपरा के अनुसार हज़रत सफ़दर हुसैन 'सफ़दर' क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह का प्रसिद्ध सलाम "तुम्हें ख़ुदाए तआला सलाम कहता है" मौलाना फ़ैज़ान वजीही ने अत्यंत भावपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत किया,जिसे सुनकर पूरा वातावरण श्रद्धा और भावनाओं से भर गया।
अंत में सलातो-सलाम के बाद देश,समाज,उम्मत-ए-मुस्लिम और विश्व में शांति,सद्भाव एवं खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।
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