प्रधानमंत्री के नाम खुला खत: UGC इक्विटी रेगुलेशन पर समर्थक डॉ. अभिषेक ने जताई आपत्ति
बीके गुलशन
बलिया, बेगूसराय। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर डॉ. अभिषेक कुमार ने उनके नाम एक खुला खत लिखकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशन को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संरक्षण के साथ-साथ सामान्य वर्ग के युवाओं को भी न्यायसंगत प्रक्रिया, शिकायतों के दुरुपयोग से सुरक्षा और अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। डॉ. अभिषेक कुमार ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व और विभिन्न नीतिगत निर्णयों के प्रति समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उनके समर्थक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखी अपनी पुस्तक ‘पहलगाम हमला Vs ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी राजनीतिक विरोधी की शिकायत नहीं, बल्कि एक समर्थक की व्यथा है।
पत्र में UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन को लेकर उठी आशंकाओं का उल्लेख करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियमों के क्रियान्वयन पर रोक तथा अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की ओर से नियमों पर पुनर्विचार किए जाने की जानकारी के बाद इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी वंचित वर्ग को संरक्षण देने से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की संभावना से है जिसमें किसी निर्दोष नागरिक को अपनी जाति के कारण संस्थागत संदेह का सामना करना पड़े। खुले खत में उन्होंने सामान्य वर्ग के युवाओं की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच संघर्ष कर रहे हैं। किसी व्यक्ति का जन्म जिस परिवार या जाति में हुआ, वह उसका चुनाव नहीं था। इसलिए जन्म के आधार पर किसी के मन में अपराधबोध या स्वयं को निर्दोष साबित करने का भय पैदा नहीं होना चाहिए। डॉ. कुमार ने कहा कि सामाजिक न्याय आवश्यक है और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध कठोर कानूनी व्यवस्था भी जरूरी है।
हालांकि, न्याय की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें पीड़ित को संरक्षण मिले और निर्दोष नागरिक को भय से मुक्ति। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि SC, ST और OBC सहित सभी वंचित वर्गों को मजबूत कानूनी संरक्षण देने के साथ सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए भी समान रूप से न्यायसंगत प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। पत्र में प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने वाली नीतियों के माध्यम से सभी वर्गों का विश्वास कायम किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रावधान की शब्दावली भ्रम पैदा कर रही है या किसी वर्ग में भय की भावना उत्पन्न कर रही है, तो उस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। डॉ. अभिषेक कुमार ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री से UGC इक्विटी रेगुलेशन के निर्णय पर पुनर्विचार करने और ऐसी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया, जिसमें न्याय जाति देखकर नहीं, व्यक्ति देखकर हो। उन्होंने कहा कि उनकी असहमति विरोध की भावना से नहीं, बल्कि वर्षों से कायम विश्वास और देश के प्रति अपेक्षाओं से जन्मी है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में आठ वर्षों का अनुभव रखने वाले नंद किशोर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बेगूसराय–पटना ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। बिहार में आधारित रहते हुए वह क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों की तथ्यपरक कवरेज कर रहे हैं।
